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प्रदेश में पारंपरिक कारीगरों के लिए वरदान बनी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, ढाई लाख से अधिक पंजीकरण

 
प्रदेश में पारंपरिक कारीगरों के लिए वरदान बनी प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, ढाई लाख से अधिक पंजीकरण

प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना एक कारगर और लाभकारी योजना के रूप में सामने आ रही है। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक हुनर से जुड़े कारीगरों को आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना के सकारात्मक परिणाम अब साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक ढाई लाख से अधिक कारीगर और शिल्पकार इस योजना के तहत पंजीकरण करा चुके हैं। इनमें बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, मोची, सुनार, राजमिस्त्री, नाई, धोबी सहित 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोग शामिल हैं। पंजीकरण कराने वालों में बड़ी संख्या ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के कारीगरों की है, जो वर्षों से सीमित संसाधनों में अपना काम कर रहे थे।

योजना के अंतर्गत कौशल विकास प्रशिक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक 1.27 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिससे उनके पारंपरिक हुनर में आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता का समावेश हुआ है। प्रशिक्षण के दौरान कारीगरों को नए औजारों के उपयोग, डिज़ाइन में नवाचार, उत्पाद की गुणवत्ता सुधार और बाज़ार की मांग के अनुसार काम करने की जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को बिना किसी गारंटी के सस्ता ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे अपना काम आगे बढ़ा सकें। पहले चरण में कारीगरों को 1 लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण में यह राशि 2 लाख रुपये तक हो सकती है। इस ऋण पर ब्याज दर भी बेहद कम रखी गई है, जिससे कारीगरों पर आर्थिक बोझ न पड़े।

इसके अलावा, योजना के तहत लाभार्थियों को टूलकिट इंसेंटिव भी दिया जा रहा है। इससे वे आधुनिक औजार खरीदकर अपने काम की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार कर पा रहे हैं। साथ ही डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्रशिक्षण और प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है, जिससे कारीगर सीधे ग्राहकों से जुड़ सकें।

प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर कारीगरों को योजना की जानकारी दी जा रही है और पंजीकरण में मदद की जा रही है।

कारीगरों का कहना है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना है, बल्कि पारंपरिक कला और शिल्प को भी नया जीवन मिल रहा है। कुल मिलाकर यह योजना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।