देश में MSME इकाइयों की संख्या 8 करोड़ के पार, राजस्थान की हिस्सेदारी 5% से भी कम
देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की संख्या अब 8 करोड़ से अधिक हो गई है, लेकिन इसमें राजस्थान की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से भी कम बताई जा रही है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, MSME सेक्टर में राजस्थान देशभर में 11वें स्थान पर है।
आंकड़ों के मुताबिक, देश में उद्यम पंजीकरण में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों का विस्तार तेजी से हो रहा है। हालांकि, राजस्थान जैसे बड़े राज्य में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी चिंता का विषय माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि यह रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में राजस्थान की कम भागीदारी यह संकेत देती है कि राज्य में छोटे उद्योगों के विकास की संभावनाएं अभी पूरी तरह से उपयोग में नहीं लाई गई हैं।
उद्योग जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइनेंसिंग और नीति समर्थन में सुधार करके राजस्थान में MSME सेक्टर को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सरकारी योजनाओं के बावजूद उद्यम पंजीकरण और वास्तविक औद्योगिक विकास के बीच अंतर को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
फिलहाल यह आंकड़ा नीति निर्माताओं के लिए एक संकेत माना जा रहा है कि राजस्थान में MSME सेक्टर को और मजबूत करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएं, ताकि राज्य देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की सूची में बेहतर स्थान हासिल कर सके।
