राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन से गांव की सांस्कृतिक धरोहर की सुरक्षा आसान होगी
राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (National Cultural Mapping Mission) के तहत अब गांवों की बौद्धिक संपदा, कला-साहित्य, मंदिर, मेले, स्थानीय उत्पाद और सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन करना आसान होगा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी सांस्कृतिक धरोहर को पहचानना और उन्हें आधुनिक कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
सांस्कृतिक मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मिशन के तहत पेटेंट और जीआई-टैग (Geographical Indication Tag) दिलाने जैसी कवायद की जाएगी, ताकि स्थानीय उत्पाद और हस्तकला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल सके। इससे न केवल कलाकारों और कारीगरों की पहचान बढ़ेगी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
हाल ही में संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों और राज्य प्रतिनिधियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ग्रामीण स्तर पर सांस्कृतिक सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक गांव की प्रमुख सांस्कृतिक गतिविधियों, त्योहारों, कला रूपों और हस्तशिल्प का डाटा संग्रहित किया जाएगा। मिशन के तहत संग्रहित जानकारी का उपयोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मानचित्रण के लिए किया जाएगा, जिससे शोधकर्ता, पर्यटक और नीति निर्माता आसानी से इन संसाधनों तक पहुँच सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण में यह कदम बहुत ही महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि आज के समय में तेजी से हो रहे शहरीकरण और आधुनिकरण के कारण कई परंपरागत कला रूप और स्थानीय ज्ञान लुप्त होने के कगार पर हैं। इस मिशन के जरिए उन्हें संरक्षित किया जा सकेगा।
सांस्कृतिक मंत्रालय ने बताया कि मिशन के तहत प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि गांव के लोग अपनी बौद्धिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के महत्व को समझें और इसमें सक्रिय भागीदारी करें। साथ ही, पेटेंट और जीआई-टैग दिलाने की प्रक्रिया में गांव के स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को मार्गदर्शन भी मिलेगा।
राज्यवार अधिकारियों ने कहा कि इस पहल से स्थानीय रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जब गांवों की सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित और मान्यता प्राप्त होगी, तो विदेशी और देशी पर्यटक इन्हें देखने और खरीदने के लिए आएंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सांस्कृतिक मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि मिशन का उद्देश्य केवल संग्रहण नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक विकास और आर्थिक संवर्द्धन भी है। इसके लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
इस तरह, राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक कानूनी सुरक्षा और पहचान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे न केवल कला, साहित्य और परंपराओं का संरक्षण होगा, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों और कलाकारों की आर्थिक समृद्धि के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।
