देवली-उनियारा में DAP खाद की किल्लत पर नरेश मीणा का ऐलान, 2 अक्टूबर को धरना; मांगें नहीं मानीं तो आमरण अनशन की चेतावनी
टोंक के देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में डीएपी खाद की कथित किल्लत और किसानों को निर्धारित दर पर खाद नहीं मिलने का मुद्दा गरमा गया है। किसान नेता नरेश मीणा ने इस मामले को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने 2 अक्टूबर को धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की है। साथ ही कहा है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन भी शुरू किया जा सकता है।
देवली क्षेत्र में हाल के दिनों में डीएपी खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें देखने को मिली हैं। देवली क्रय-विक्रय सहकारी समिति पर किसानों को खाद के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। किसानों ने वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त पॉस मशीनें लगाने की मांग भी उठाई है।
नरेश मीणा ने खाद की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था को लेकर प्रशासन से किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि किसानों को खाद के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कुछ स्थानों पर मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित कीमत पर पर्याप्त खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
खाद संकट को लेकर टोंक जिले में पहले भी किसानों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। सितंबर में पांसरोटिया में डीएपी की कमी को लेकर किसान महापंचायत के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया था। किसानों ने खाद वितरण की प्रक्रिया और उपलब्धता को लेकर नाराजगी जताई थी।
वहीं, टोंक-सवाई माधोपुर सांसद हरीश चंद्र मीना ने भी 27 सितंबर को केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर क्षेत्र में डीएपी और यूरिया की पर्याप्त एवं नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। पत्र में खाद की किल्लत, निर्धारित मूल्य पर खाद नहीं मिलने, जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों का उल्लेख किया गया।
केंद्र सरकार की ओर से 50 किलो डीएपी बैग का अधिकतम खुदरा मूल्य 1,350 रुपये बनाए रखने की जानकारी दी गई है।
अब देवली-उनियारा क्षेत्र में 2 अक्टूबर को प्रस्तावित धरना प्रदर्शन को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच आगे क्या स्थिति बनती है, इस पर नजर रहेगी। नरेश मीणा ने स्पष्ट किया है कि किसानों की मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
