नदबई का विजयपाल हत्याकांड, मोहित उर्फ मोनू की जिंदगी हुई त्रासदीपूर्ण अंत
कभी खुशी-कभी ग़म… यह कहावत मोहित उर्फ मोनू की जिंदगी पर सटीक बैठती दिखी। 15 फरवरी को लगन समारोह में डांस करते हुए नजर आया यह युवक, 18 फरवरी को अदालत से उम्रकैद की सजा पाता है और 23 फरवरी को अस्पताल में उसकी मौत हो जाती है।
मोहित मोनू पर विजयपाल हत्याकांड में हत्या का आरोप था। अदालत ने लंबे और विस्तृत सुनवाई के बाद उसे दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी थी और लोग लगातार इसकी कानूनी कार्रवाई पर निगाह बनाए हुए थे।
15 फरवरी को हुए लगन समारोह में मोहित का डांस करना और सामान्य जीवन जीता दिखना एक तरह से उसकी नियति और घटनाओं के क्रम का विरोधाभास दर्शाता है। उसके जीवन में खुशी और उल्लास का पल अचानक ही दुख और त्रासदी में बदल गया।
18 फरवरी को अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मोहित के चेहरे पर चिंता और मानसिक दबाव साफ देखा गया। परिवार और आसपास के लोग इस निर्णय से झटका महसूस कर रहे थे। अदालत ने अपराध के गंभीरता को देखते हुए यह कठोर सजा सुनाई।
23 फरवरी को मोहित मोनू की अस्पताल में मौत ने पूरे मामले को और भी दुखद बना दिया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उसे भर्ती कराया गया था, लेकिन चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
विशेषज्ञों का कहना है कि मोहित की अचानक मौत ने इस हाई-प्रोफाइल केस में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जेल में उसे पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं मिली थीं या नहीं। साथ ही, यह घटना अपराध और सजा के बीच इंसानियत के पहलू को भी उजागर करती है।
विजयपाल हत्याकांड ने नदबई क्षेत्र में लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा की थी। मोहित मोनू पर आरोप तय होने के बाद ही जनता और परिवार दोनों के जीवन में शांति और तनाव का मिश्रित माहौल रहा।
कुल मिलाकर, मोहित उर्फ मोनू की जिंदगी ने समाज को यह याद दिलाया कि अपराध और उसकी सजा केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यक्ति और उसके परिवार के जीवन पर गहरा असर डालती है। 15 फरवरी की खुशी, 18 फरवरी का न्यायिक निर्णय और 23 फरवरी की मौत—तीन दिन में जीवन और मौत का यह नाटकीय क्रम लोगों को सदमे में डाल गया।
