मिड-डे-मील निरीक्षण: अफसर सिर्फ कागजी कार्रवाई में लगे, हकीकत में सुधार नहीं
शिक्षा विभाग। हाल ही में मिड-डे-मील के सघन निरीक्षण को लेकर आरोप लगे हैं कि अफसर केवल सरकार के निर्देशों की कागजी पालना कर रहे हैं, जबकि हकीकत में पिछले साल भी इसी तरह का निरीक्षण कराया गया था, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
जानकारी के अनुसार, आयुक्तालय ने 2025 में दो दिवसीय मिड-डे-मील सघन निरीक्षण आयोजित किया था। यह निरीक्षण 24 और 25 सितंबर को किया गया था। इसके दौरान स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता, पोषण स्तर, स्वच्छता और वितरण की प्रक्रिया का मूल्यांकन किया गया था।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह निरीक्षण नियमित कार्यवाही का हिस्सा था और रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को भेज दी गई थी। लेकिन शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय लोग मानते हैं कि निरीक्षण के बाद भी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। स्कूलों में मिड-डे-मील की गुणवत्ता और वितरण में अभी भी कई कमियां बनी हुई हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कागजी निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होता। यदि हकीकत में सुधार लाना है तो स्थानीय स्तर पर निगरानी, नियमित फीडबैक और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान पाए गए खामियों पर त्वरित कार्रवाई और सुधारात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन जरूरी है।
अभिभावक और शिक्षक इस बात पर चिंतित हैं कि बच्चों को मिलने वाला भोजन पोषण और सुरक्षा के मानकों के अनुरूप नहीं है। कई स्कूलों में मिड-डे-मील वितरण में देरी, स्वच्छता की कमी और गुणवत्ता में गिरावट की शिकायतें मिलती रही हैं।
वहीं, विभाग के कुछ अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण रिपोर्ट में सुधार के लिए सुझाव दिए गए थे और आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन जमीन पर अमल की प्रक्रिया कमजोर रही।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि मिड-डे-मील जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम की सफलता के लिए नियमित और प्रभावी निगरानी, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता अनिवार्य है। केवल रिपोर्ट तैयार करना और निरीक्षण का रिकॉर्ड रखना पर्याप्त नहीं है।
इस मामले में शिक्षा विभाग ने फिलहाल कहा है कि आगामी निरीक्षणों में न केवल कागजी रिपोर्ट बल्कि वास्तविक स्थिति पर ध्यान दिया जाएगा और बच्चों तक पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि मिड-डे-मील कार्यक्रम की सफलता सिर्फ निरीक्षण से नहीं बल्कि वास्तविक सुधार और जवाबदेही पर निर्भर करती है।
