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भरतपुर के शिक्षक जगन्नाथप्रसाद शर्मा ने खोली अनूठी पाठशाला, सिखा रहे जहर-मुक्त खेती

 
भरतपुर के शिक्षक जगन्नाथप्रसाद शर्मा ने खोली अनूठी पाठशाला, सिखा रहे जहर-मुक्त खेती

भरतपुर जिले के नौगाया निवासी जगन्नाथप्रसाद शर्मा पेशे से शिक्षक रहे हैं। मगर सेवानिवृत्ति के बाद आराम करने की बजाय उन्होंने जहर-मुक्त और जैविक खेती के लिए एक अनूठी पाठशाला खोली है। इस पाठशाला में वे किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर जैविक और औषधि फसलों की खेती के तरीके सिखा रहे हैं।

जगन्नाथप्रसाद शर्मा ने अब तक सैकड़ों किसानों को जैविक खेती के गुर सिखाए हैं। उनके मार्गदर्शन में किसान अब रासायनिक कीटनाशक और उर्वरकों का प्रयोग कम कर, प्राकृतिक तरीकों से फसल उगा रहे हैं। इससे न सिर्फ फसलों की गुणवत्ता बढ़ी है, बल्कि स्वास्थ्य और मिट्टी की उर्वरता भी बनी हुई है।

खुद भी शर्मा जी औषधि फसलें, मसाले और जैविक फसलें उगाते हैं। उनके खेत में अदरक, हल्दी, तुलसी और नीम जैसी फसलों का सफल उत्पादन होता है। वे किसानों को पौधों की सही देखभाल, जैविक खाद और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के तरीके भी समझाते हैं।

किसानों का कहना है कि शर्मा जी की पाठशाला ने उनकी सोच बदल दी है। पहले रसायनों के इस्तेमाल से उनकी फसलें प्रभावित होती थीं, लेकिन अब उन्होंने जैविक खेती अपनाकर न केवल लागत कम की है, बल्कि उपज और बाजार मूल्य में भी वृद्धि की है।

जगन्नाथप्रसाद शर्मा का उद्देश्य केवल खेती सिखाना ही नहीं है, बल्कि यह भी है कि किसान स्वस्थ जीवन और टिकाऊ कृषि की ओर कदम बढ़ाएं। उनका मानना है कि जहर-मुक्त खेती से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहता है, बल्कि किसानों की आय और समाज का स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।

भरतपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह पाठशाला किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। धीरे-धीरे अधिक से अधिक किसान इस प्रणाली को अपनाने लगे हैं, जिससे जैविक खेती का संदेश पूरे जिले में फैल रहा है।

संक्षेप में कहा जाए तो शिक्षक जगन्नाथप्रसाद शर्मा ने सेवानिवृत्ति के बाद समाज और किसानों के लिए एक मिसाल कायम की है, जो न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधर रही है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है।