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भरतपुर निकाय चुनाव में निर्दलीयों का दबदबा, कई जगह बोर्ड बनाने में निभाएंगे अहम भूमिका

 
भरतपुर निकाय चुनाव में निर्दलीयों का दबदबा, कई जगह बोर्ड बनाने में निभाएंगे अहम भूमिका

भरतपुर जिले में नगर निकाय चुनाव के नतीजे पूरी तरह सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। जिले की 6 नगर पालिका और नगर निगम के चुनाव परिणामों में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रभाव साफ दिखाई दिया है। कई निकायों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने बड़ी संख्या में जीत दर्ज की है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक दल के लिए बोर्ड बनाने की राह आसान नहीं होगी और कई जगह निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जरूरी हो सकता है।

भरतपुर जिले में हुए नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला देखने को मिला। परिणाम सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि मतदाताओं ने कई वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों के बजाय निर्दलीय उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। यही वजह है कि अब निकायों में बोर्ड गठन के लिए राजनीतिक दलों को निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधना पड़ सकता है।

नगर निगम क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी रोड शो किया था। मुख्यमंत्री के रोड शो को भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान का अहम हिस्सा माना गया था। इसके बावजूद अंतिम नतीजों में कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रभाव देखने को मिला। इससे स्थानीय निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ की भूमिका भी सामने आई है।

निकाय चुनाव के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती बोर्ड गठन को लेकर है। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने पक्ष में बहुमत जुटाने के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

निर्दलीय पार्षदों की मजबूत संख्या यह भी बताती है कि स्थानीय स्तर पर मतदाताओं ने पार्टी की बजाय उम्मीदवार को प्राथमिकता दी। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और व्यक्तिगत जनसंपर्क के आधार पर चुनाव मैदान में उतरे थे। चुनाव परिणामों ने उनकी रणनीति को सफल साबित किया है।

अब बोर्ड गठन के लिए राजनीतिक जोड़तोड़ का दौर शुरू होने की संभावना है। निर्दलीय पार्षदों से संपर्क और समर्थन को लेकर दोनों प्रमुख दलों की सक्रियता बढ़ सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्दलीय पार्षद किस दल के साथ जाते हैं और किन निकायों में उनका समर्थन बोर्ड गठन के लिए निर्णायक साबित होता है।

भरतपुर के निकाय चुनाव परिणामों ने स्थानीय राजनीति में निर्दलीयों की ताकत को एक बार फिर सामने ला दिया है। जिले की 6 नगर पालिका और नगर निगम में कई जगह उनके समर्थन के बिना बोर्ड बनाना मुश्किल हो सकता है। अब चुनाव परिणामों के बाद राजनीतिक दलों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर है और आने वाले दिनों में बोर्ड गठन को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।