अवैध क्रेशरों के खिलाफ घाटरी में अनिश्चितकालीन धरना शुरू, पहाड़ों को नुकसान और प्रदूषण का आरोप
क्षेत्र में संचालित कथित अवैध क्रेशरों के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। घाटरी में लोगों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अवैध रूप से चल रहे क्रेशरों के कारण पहाड़ों को भारी नुकसान पहुंच रहा है और क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से क्रेशर संचालकों की गतिविधियों के कारण पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। पत्थर तोड़ने के दौरान उड़ने वाली धूल से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से भी स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
धरना दे रहे लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस संबंध में शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि जब तक अवैध क्रेशरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि क्रेशरों के संचालन से क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंच रहा है। पहाड़ों की कटाई से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका है। वहीं, धूल और प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में संचालित सभी क्रेशरों की जांच कराई जाए और जो भी इकाइयां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने अवैध खनन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने की भी मांग की है।
धरने की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई अंतिम कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की है, ताकि क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के नुकसान को रोका जा सके।
फिलहाल घाटरी में शुरू हुआ यह धरना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और अवैध क्रेशरों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाती है।
