बाजरे की एमएसपी पर खरीद की मांग: किसान संघ ने सौंपा ज्ञापन, किसानों को 800 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान
बाजरे की खरीद को लेकर किसानों की परेशानी सामने आई है। किसानों का कहना है कि उन्हें बाजरे का उचित भाव नहीं मिल रहा है, जिससे उन्हें प्रति क्विंटल करीब 800 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस समस्या को लेकर किसान संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बाजरे की न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर खरीद शुरू कराने की मांग की है।
किसान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि बाजरा क्षेत्र के किसानों की प्रमुख फसलों में शामिल है। किसान पूरी मेहनत और लागत लगाकर फसल तैयार करते हैं, लेकिन मंडियों में अपेक्षित भाव नहीं मिलने के कारण उनकी परेशानी बढ़ गई है। किसानों का आरोप है कि मौजूदा बाजार भाव एमएसपी से कम होने के कारण उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ रही है।
एमएसपी पर खरीद शुरू करने की मांग
किसान संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में बाजरे की सरकारी खरीद एमएसपी पर कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया जाता है, लेकिन यदि किसानों को उस कीमत पर खरीद की सुविधा नहीं मिले तो एमएसपी का लाभ वास्तविक रूप से उन तक नहीं पहुंच पाता।
संघ ने प्रशासन से मांग की कि संबंधित खरीद केंद्रों पर बाजरे की खरीद की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। किसानों ने कहा कि सरकारी खरीद होने से उन्हें बाजार में कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।
प्रति क्विंटल 800 रुपए नुकसान का दावा
किसान संघ के अनुसार वर्तमान भाव और एमएसपी के बीच अंतर के कारण किसानों को करीब 800 रुपए प्रति क्विंटल तक का नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन पर खर्च बढ़ने के बावजूद उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।
किसानों ने कहा कि यदि समय रहते बाजरे की खरीद एमएसपी पर शुरू नहीं की गई तो बड़ी संख्या में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान संघ के पदाधिकारियों और किसानों ने अपनी समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराया। उन्होंने मांग की कि बाजरे की खरीद को लेकर जल्द निर्णय लिया जाए और किसानों को एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए।
किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद व्यवस्था मजबूत होने से उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा। अब किसान संघ की मांग पर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर किसानों की नजर है।
