जनगणना ड्यूटी से बचने के बहाने? सरकारी दफ्तरों में अचानक बढ़ीं “बीमारियां”
शहर में जनगणना की तैयारियां शुरू होते ही सरकारी दफ्तरों का माहौल कुछ बदला-बदला नजर आ रहा है। जहां कल तक अधिकारी और कर्मचारी पूरी मुस्तैदी के साथ अपने काम में जुटे दिखाई दे रहे थे, वहीं अब जनगणना ड्यूटी के आदेश मिलते ही कई कर्मचारियों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी है।
जानकारी के अनुसार, जनगणना कार्य के लिए जैसे ही कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं, वैसे ही कई दफ्तरों में मेडिकल अवकाश के आवेदन बढ़ गए हैं। कुछ कर्मचारियों ने आंखों की कमजोरी, तो कुछ ने दिल की धड़कन तेज होने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देकर ड्यूटी से छूट मांगी है।
सूत्रों का कहना है कि यह स्थिति लगभग कई विभागों में देखने को मिल रही है। जिन कर्मचारियों को जनगणना जैसे फील्ड वर्क में लगाया गया है, वे इससे बचने के लिए विभिन्न कारणों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि सभी मामले वास्तविक हैं या कुछ कर्मचारी ड्यूटी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, जिसमें सभी की भागीदारी जरूरी है। ऐसे में बिना ठोस कारण के ड्यूटी से बचना उचित नहीं है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि संदिग्ध मामलों की जांच कराई जा सकती है और जरूरत पड़ने पर मेडिकल सर्टिफिकेट का सत्यापन भी किया जाएगा।
वहीं, कुछ कर्मचारी यह भी तर्क दे रहे हैं कि फील्ड में काम करना चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर गर्मी और लंबी दूरी के कारण। उनका कहना है कि स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर ड्यूटी करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना जैसे बड़े अभियान के सफल संचालन के लिए कर्मचारियों का सहयोग बेहद जरूरी है। साथ ही, प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधाएं और सुरक्षा मिले, ताकि वे बिना किसी डर या परेशानी के अपना काम कर सकें।
फिलहाल, शहर में यह स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कैसे संभालता है और जनगणना कार्य को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
