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कृषि के साथ पशुपालन बना किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत आधार, राजस्थान में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में इजाफा

 
कृषि के साथ पशुपालन बना किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत आधार, राजस्थान में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में इजाफा

राजस्थान में कृषि के साथ-साथ पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने में कारगर साबित हो रहा है। बदलते समय में खेती के साथ डेयरी और पशुपालन को अपनाने से प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता पर भी पड़ा है, जिसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

केंद्र सरकार की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति व्यक्ति दूध की राष्ट्रीय औसत उपलब्धता 471 ग्राम प्रति दिन है। वहीं राजस्थान इस मामले में राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ने के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और किसानों को नियमित आय का एक स्थायी साधन भी मिला है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के बावजूद पशुपालन यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है। खासकर गाय, भैंस, ऊंट, भेड़ और बकरी पालन ने किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर दिया है। कृषि पर निर्भरता कम होने और पशुपालन से होने वाली आय के चलते किसानों को मौसम की मार से भी कुछ हद तक राहत मिली है।

प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं ने भी पशुपालन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। डेयरी विकास से जुड़ी योजनाएं, पशुओं के लिए टीकाकरण, बेहतर नस्ल के पशुओं की उपलब्धता और दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार से दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, गांव-गांव में दुग्ध संग्रहण केंद्रों की स्थापना से किसानों को उनके दूध का उचित मूल्य मिल रहा है।

राजस्थान के कई जिलों में अब किसान केवल फसल पर निर्भर नहीं रह गए हैं। वे खेती के साथ डेयरी व्यवसाय को अपनाकर सालभर आय अर्जित कर रहे हैं। खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए पशुपालन एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है। दूध की नियमित बिक्री से उन्हें नकद आय मिलती है, जिससे घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें आसानी से पूरी हो पा रही हैं।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दूध की बढ़ती उपलब्धता से पोषण स्तर में भी सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में दूध और दुग्ध उत्पाद मिलने लगे हैं, जिससे कुपोषण की समस्या कम करने में मदद मिल रही है। यही कारण है कि पशुपालन को केवल आय का साधन ही नहीं, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य सुधार से भी जोड़ा जा रहा है।

राज्य में दुग्ध संघों और सहकारी संस्थाओं की सक्रिय भूमिका ने भी इस क्षेत्र को मजबूती दी है। किसानों को प्रशिक्षण देकर आधुनिक डेयरी तकनीकों से जोड़ा जा रहा है, जिससे दूध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार हो रहा है।

कुल मिलाकर, राजस्थान में कृषि के साथ पशुपालन किसानों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बनकर सामने आया है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में हुई वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि यदि नीतिगत समर्थन और संसाधन सही दिशा में मिलें, तो पशुपालन प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बना सकता है।