जयपुर के किसान ने मिसाल पेश की: कम पानी और विपरीत जलवायु में भी सफल बागवानी, एक बीघा से शुरू किया सफर
राजस्थान के जयपुर जिले में चौमूं के पास स्थित रामपुरा गांव के डॉ. बीसी जाट ने यह साबित कर दिखाया है कि कम पानी और विपरीत जलवायु परिस्थितियों में भी खेती संभव है। उन्होंने परंपरागत खेती से हटकर बागवानी का रास्ता चुना और आज वह क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत के रूप में देखे जा रहे हैं।
डॉ. बीसी जाट ने वर्ष 1996 में अपने खेत के मात्र एक बीघा हिस्से में आंवले के पौधे लगाकर इस अनोखी पहल की शुरुआत की थी। उस समय वे एमए की पढ़ाई कर रहे थे और उनका परिवार परंपरागत खेती से जुड़ा हुआ था। शुरुआती दौर में आंवले की खेती को लेकर कई तरह की चुनौतियाँ सामने आईं, क्योंकि उस समय क्षेत्र में इस प्रकार की बागवानी का अधिक चलन नहीं था।
हालांकि, लगातार मेहनत, धैर्य और सही कृषि तकनीकों के उपयोग से उन्होंने अपनी खेती को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे आंवले के पेड़ विकसित होने लगे और उत्पादन भी बेहतर होने लगा। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से जल संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता पर ध्यान देकर इस खेती को सफल बनाया।
डॉ. बीसी जाट का मानना है कि राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में भी अगर सही फसल का चयन किया जाए और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किया जाए, तो खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने आंवले को इसलिए चुना क्योंकि यह कम पानी में भी आसानी से विकसित हो जाता है और बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है।
समय के साथ उनका यह प्रयोग सफल साबित हुआ और आज उनकी बागवानी एक बड़े क्षेत्र में फैल चुकी है। आसपास के किसान भी उनसे प्रेरणा लेकर बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने कई किसानों को प्रशिक्षण भी दिया है, जिससे क्षेत्र में वैकल्पिक खेती को बढ़ावा मिला है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डॉ. बीसी जाट का यह प्रयास सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए एक मॉडल की तरह है। इससे यह संदेश मिलता है कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल उनका यह सफल प्रयोग अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है और क्षेत्र में कृषि नवाचार का एक अच्छा उदाहरण माना जा रहा है।
