लाठी-डंडों से हत्या के 14 आरोपी तीन महीने से फरार, IG ऑफिस पहुंचे ग्रामीण; पुलिस पर गंभीर आरोप
लाठी-डंडों से हुई हत्या के मामले में 14 आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से नाराज ग्रामीण आईजी कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ शिकायत देते हुए आरोप लगाया कि हत्या के मामले में नामजद आरोपी करीब तीन महीने से फरार हैं, लेकिन पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हत्या के मामले में कार्रवाई की मांग करने पर पुलिस की ओर से उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि परिवार और ग्रामीणों के खिलाफ चोरी का कथित झूठा मामला दर्ज कर राजीनामा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने आईजी से मामले में निष्पक्ष जांच और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।
तीन महीने से गिरफ्तारी का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक, लाठी-डंडों से हमला कर एक व्यक्ति की हत्या की गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को नामजद किया। ग्रामीणों का दावा है कि मामले में 14 आरोपी करीब तीन महीने से फरार हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इतने समय बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित परिवार में नाराजगी है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की।
चोरी का केस दर्ज करने का आरोप
आईजी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि हत्या के मामले में समझौता करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि इसके लिए उनके पक्ष के लोगों के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया गया।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि हत्या के मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई होती तो उन्हें उच्च अधिकारियों के कार्यालय तक नहीं आना पड़ता। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और किसी भी पक्ष पर दबाव नहीं बनाने की मांग की।
निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग
ग्रामीणों ने आईजी को ज्ञापन देकर हत्या के मामले में फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही चोरी के मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी गई है।
फिलहाल पुलिस की ओर से ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अब आईजी कार्यालय में दी गई शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से मामले में क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की नजर है।
