बाड़मेर में वार्ड आरक्षण की लॉटरी से बदले समीकरण, पूर्व सभापति-पार्षदों को बदलना पड़ेगा वार्ड
राजस्थान के बाड़मेर में निकाय चुनाव से पहले वार्ड आरक्षण की लॉटरी ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। आरक्षण प्रक्रिया के बाद कई पुराने नेताओं को अब अपने चुनावी क्षेत्र बदलने पड़ सकते हैं। पूर्व सभापति और कई पार्षदों के वार्ड आरक्षित होने के कारण उनके सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
लॉटरी के बाद कहीं राजनीतिक गुटबाजी तेज हो गई है तो कहीं पुराने नेताओं के वर्चस्व की लड़ाई सामने आने लगी है। संभावित उम्मीदवार अब नए वार्डों में अपनी जमीन तलाशने में जुट गए हैं।
पुराने नेताओं के सामने नई चुनौती
बाड़मेर नगर निकाय में लंबे समय से सक्रिय कई नेताओं के वार्ड आरक्षण की वजह से बदल गए हैं। ऐसे में पूर्व सभापति और पुराने पार्षदों को अब दूसरे वार्डों से चुनाव लड़ने की रणनीति बनानी पड़ सकती है।
कई नेताओं ने वर्षों से अपने वार्ड में पकड़ मजबूत की थी, लेकिन आरक्षण बदलने के बाद उन्हें नए क्षेत्र में मतदाताओं के बीच अपनी पहचान बनाने की चुनौती होगी।
गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई तेज
आरक्षण सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों के अंदर भी हलचल बढ़ गई है। कई वार्डों में एक से ज्यादा दावेदार सामने आने लगे हैं। टिकट को लेकर गुटबाजी की स्थिति बनने लगी है।
कुछ क्षेत्रों में पुराने नेताओं और नए दावेदारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिल रही है। राजनीतिक दलों के सामने अब जिताऊ उम्मीदवार चुनना बड़ी चुनौती होगी।
नए चेहरों को मिल सकता है मौका
वार्ड आरक्षण से कई नए चेहरों के लिए चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता खुल गया है। खासतौर पर आरक्षित वार्डों में नए उम्मीदवार अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं।
महिला आरक्षण वाले वार्डों में भी राजनीतिक दलों की नजर मजबूत महिला उम्मीदवारों की तलाश पर है।
चुनावी तैयारियां हुई तेज
वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवारों ने जनसंपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है।
राजनीतिक दल भी वार्डवार समीकरणों का आकलन कर रहे हैं। किस वार्ड से किसे मैदान में उतारा जाए, इसे लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
आरक्षण के बाद बदलेगा चुनावी गणित
बाड़मेर में वार्ड आरक्षण ने निकाय चुनाव का पूरा गणित बदल दिया है। जहां कुछ पुराने नेताओं को नए वार्ड तलाशने होंगे, वहीं नए दावेदारों को मौका मिलने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में टिकट वितरण और उम्मीदवारों की घोषणा के साथ राजनीतिक तस्वीर और साफ होगी। फिलहाल सभी की नजर चुनावी रणनीति और प्रत्याशियों के चयन पर टिकी हुई है।
