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वाह रे डिजिटल इंडिया, राजस्थान में पेड़ पर चढ़कर मोबाइल से बात करते हैं लोग, नेटवर्क की समस्या बनी मुसीबत

 
वाह रे डिजिटल इंडिया: राजस्थान में पेड़ पर चढ़कर मोबाइल से बात करते हैं लोग, नेटवर्क की समस्या बनी मुसीबत

आज के डिजिटल युग में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। लेकिन राजस्थान के कुछ दूरदराज इलाकों में यह "डिजिटल इंडिया" का सपना धूमिल होता नजर आ रहा है। यहां, नेटवर्क की गंभीर समस्या के कारण लोग पेड़ पर चढ़कर मोबाइल से बात करने को मजबूर हैं। जी हां, यह सुनकर आपको आश्चर्य हो सकता है, लेकिन यह सच है। सूरतगढ़ जैसे इलाके में, जहां नेटवर्क कवरेज बेहद कमजोर है, लोग पेड़ की ऊँचाई पर चढ़कर फोन पर बातचीत करते हैं क्योंकि नीचे बैठने पर नेटवर्क नहीं आता।

यह समस्या पिछले कुछ महीनों से स्थानीय निवासियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। लोग अपनी जरूरी कॉल्स करने के लिए पेड़ पर चढ़ने की मजबूरी को बयां कर रहे हैं। यह स्थिति डिजिटल इंडिया के सपने पर एक बड़ा सवालिया निशान है, क्योंकि सरकार ने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, लेकिन इन दूरदराज क्षेत्रों में इन सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है।

स्थानीय निवासी बताते हैं कि नेटवर्क की कमी के कारण वे अपने घरों में बैठकर भी कॉल्स नहीं कर पाते। ऐसा ही हाल इंटरनेट सेवाओं का भी है। कई बार तो पेड़ के ऊपरी हिस्से पर चढ़कर ही कुछ समय के लिए सिग्नल मिल पाता है। यह एक अजीब स्थिति है, जहां लोग खुद को डिजिटल युग के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बुनियादी नेटवर्क सेवाएं भी उनसे दूर हैं।

इस समस्या का मुख्य कारण बताया जा रहा है कि राजस्थान के कुछ ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की कमी है। इसके अलावा, भूगोलिक कारणों से भी कई इलाके ऐसे हैं जहां सिग्नल का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए भी नेटवर्क के सिग्नल की तलाश में पेड़ पर चढ़ने को मजबूर हैं।

यह दृश्य देखकर यह समझ में आता है कि तकनीकी विकास और स्मार्टफोन का इस्तेमाल केवल उन्हीं लोगों तक सीमित नहीं रह सकता जो बड़े शहरों में रहते हैं, बल्कि यह ग्रामीण इलाकों में भी प्रभावी होना चाहिए।

सूरतगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों ने इस समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन से कई बार शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द इन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति को सुधारा जाए ताकि वे डिजिटल इंडिया के सपने को वास्तविकता में बदल सकें।

क्या यह एक हास्यास्पद स्थिति है या फिर हमें डिजिटल अवसंरचना को लेकर गंभीर कदम उठाने की आवश्यकता है? यह सवाल सभी के मन में उठता है। डिजिटल इंडिया का सपना तभी साकार हो सकता है जब इंटरनेट और नेटवर्क की बुनियादी सुविधाएं हर छोटे से छोटे गांव तक पहुंचाई जाएं।