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सरकारी स्कूल शिक्षक ने महिला सहकर्मियों को भेजे अश्लील मैसेज और धमकियां, जांच शुरू

 
सरकारी स्कूल शिक्षक ने महिला सहकर्मियों को भेजे अश्लील मैसेज और धमकियां, जांच शुरू

बाड़मेर जिले के एक सरकारी स्कूल में एक शिक्षक द्वारा अपनी महिला सहकर्मियों को अश्लील मैसेज भेजने और रेप व जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। यह घटना शिक्षा विभाग और स्थानीय समाज में चिंता का विषय बन गई है।

सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया। इसके साथ ही विभाग ने स्कूल में तीन महिला सदस्यों की जांच कमेटी गठित की है। कमेटी को पाँच दिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आरोपी शिक्षक के खिलाफ आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जांच कमेटी में शामिल सदस्यों का काम घटना की गंभीरता से निपटना और पीड़ित महिला शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कमेटी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में शिक्षकों के बीच हुई घटनाओं का पूरा विवरण और प्रमाण शामिल किए जाएंगे।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ स्कूल और शिक्षण संस्थानों के सुरक्षित वातावरण को खतरे में डालती हैं। महिला कर्मचारियों के प्रति इस तरह का व्यवहार न केवल व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि पूरे शिक्षण माहौल के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन और शिक्षा विभाग से अपील की कि ऐसी घटनाओं में तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।

स्थानीय लोगों और स्कूल के अन्य कर्मचारियों ने इस कदम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

शिक्षा विभाग ने कहा कि जांच पूरी होने और कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपी शिक्षक के खिलाफ अनुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्कूलों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि महिला कर्मचारियों के लिए शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल, शिकायत पटल और शिकायत निवारण प्रणाली अनिवार्य होनी चाहिए। इससे न केवल कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल मिलेगा, बल्कि ऐसे घटनाओं के प्रति तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

बाड़मेर की यह घटना स्पष्ट करती है कि महिलाओं के प्रति किसी भी तरह के उत्पीड़न और धमकियों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षा संस्थानों में ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई न केवल पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करती है, बल्कि पूरे समाज में समानता और सुरक्षा का संदेश भी देती है।

इस प्रकार, शिक्षा विभाग की जांच कमेटी और निलंबन के कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि महिला शिक्षकों के प्रति सुरक्षा सुनिश्चित होगी और आरोपी शिक्षक के खिलाफ उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।