बाड़मेर की धोरों वाली धरती पर ‘फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान’: गरीबी से निकलकर एमबीबीएस तक का सफर
भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक बाड़मेर की रेतीली धरती पर एक अनोखी ‘पाठशाला’ चल रही है, जो गरीबी और अभाव की कड़वाहट को कामयाबी की मिठास में बदल रही है। यह कहानी है ‘फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान’ की, जिसने सीमांत क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा और अवसर के जरिए नई उड़ान दी है।
संस्थान की स्थापना का उद्देश्य सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों के उन बच्चों को आगे बढ़ाना है, जिनके पास संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई के बड़े अवसर नहीं हैं। यहां शिक्षा की जो प्रणाली अपनाई गई है, वह न सिर्फ अकादमिक रूप से बल्कि जीवन कौशल और मानसिक विकास के लिहाज से भी बच्चों को तैयार करती है।
संस्थान ने अब तक अनेक छात्रों को एमबीबीएस, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में सफलता दिलाई है, जो साबित करता है कि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर सीमांत क्षेत्रों के बच्चे भी बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं। संस्थान के शिक्षकों का कहना है कि यह प्रयास केवल शैक्षिक सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और समाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करता है।
संस्थान की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि यह रेतीली और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाके में काम कर रहा है। सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां सुविधाओं की कमी आम बात है, लेकिन संस्थान ने दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयास के जरिए बच्चों के सपनों को आकार दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान’ ने बच्चों और उनके परिवारों की सोच ही बदल दी है। जहां पहले शिक्षा केवल सपना थी, अब यही सपना एमबीबीएस जैसी उपलब्धियों में बदल रहा है। संस्थान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि गरीबी और सीमांत इलाके की चुनौतियां भी बच्चों की मेहनत और सही मार्गदर्शन से पार की जा सकती हैं।
यह पहल न सिर्फ बाड़मेर के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे भारत के ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा के महत्व को उजागर करती है। फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान यह संदेश दे रहा है कि संसाधनों की कमी बाधा नहीं, बल्कि मेहनत और मार्गदर्शन से सफलता की राह खोली जा सकती है।
