Barmer खेजड़ी के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, कोई नहीं पूछता कोई नहीं रोकता

प्राथमिकता भी नहीं
बढ़ते ओद्यौगिकरण में खेजड़ी के जितने वृक्ष काटे गए है, उतने वापस नहीं लगे हैं। कंपनियों की ओर से अन्य पौधे ज्यादा लगाए गए हैं। खेजड़ी की उपजाऊ जमीन रेगिस्तान में ही इससे खेजड़ी कम हो रही है। 31 अक्टूबर, 1983 में खेजड़ी को सरकार ने राज्य वृक्ष घोषित किया। के रूप में घोषित किया था. लेकिन यह दुखद विषय है कि जिस खेजड़ी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपने जीवन का बलिदान दिया। आज वह वृक्ष अपने असितत्व की लडाई लड़ रहा है.। उद्योगों के पानी ने मारवाड़ के तीन जिलों में खेजड़ी को सघन नुकसान पहुंचाया है. इसके अलावा फलौदी, जैसलमेर क्षेत्र में लग रहे सोलर प्लांट के चलते खेतों में खड़े बेहिसाब खेजड़ी वृक्षों को काट दिया गया है। सरकार इसको लेकर कोई कदम नहीं उठा रही है।
देवाराम विश्नोई, पर्यावरण प्रेमी
यहां-यहां हुई कटाई
कोयले के लिए 55 हजार बीघा जमीन पर लीज पर दी गई। इस जमीन में लगे खेजड़ी के लाखों पेड़ कट गए
हाइटेंशन लाइनों के लिए बाड़मेर, शिव, पोकरण, जैसलमेर तक बड़े-बड़े खंभे लगाए जा रह है। इसमें आने वाले खेजड़ी के पेड़ों को अंधाधुंध काटा जा रहा है
पवन चक्कियां लगाने वाली कंपनियां भी लीज पर लेने वाली जमीन से खेजड़ी को नष्ट कर रही है- सोलर प्लांट के लिए भी खेजड़ी के वृक्ष कट रहे हैं
जुर्माना कठोर करना होगा
नियमानुसार खेजड़ी काटने के लिए संबधित अधिकारी की मंजूरी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नही रहा है। इसे काटने पर जुर्माना और दंड दोनों कठोर होने आवश्यक है। वर्तमान में राजस्थान टेनेंसी एक्ट 1956 की धारा 84 में वृक्ष काटने पर कोई सजा का प्रावधान नहीं है। राज्य वृक्ष खेजड़ी को काटने पर सिर्फ 100 रुपए जुर्माना वसूला जाता है। दोबारा काटने पर 200 रुपए ही जुर्माना है। खेजड़ी की बेहिसाब कटाई को लेकर प्रशासन की ओर से भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। राज्य वृक्ष की कटाई से पहले न तो इजाजत ली जा रही है और न ही इसके काटने के बाद किसी प्रकार का जुर्माना भी किया गया है।