बाड़मेर निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस में कलह, पूर्व विधायक मेवाराम जैन और जिलाध्यक्ष आमने-सामने
बाड़मेर में नगर निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद कांग्रेस के भीतर आपसी कलह खुलकर सामने आ गई है। चुनाव परिणामों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। पूर्व विधायक मेवाराम जैन और कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा ने एक-दूसरे पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं के बयानों के बाद स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति चर्चा में आ गई है।
पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने टिकट वितरण को लेकर पार्टी संगठन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनके अपने वार्डों में भी उनकी राय को महत्व नहीं दिया गया। मेवाराम जैन के मुताबिक वार्ड नंबर 54, 2 और 1 में उनकी राय से टिकट नहीं दिए गए। उन्होंने टिकट वितरण की प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यदि स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय को महत्व दिया जाता तो चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर हो सकता था।
पूर्व विधायक के बयान के बाद कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और तेज हो गई है। उन्होंने चुनाव परिणामों के संदर्भ में संगठन की रणनीति और टिकट वितरण को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पार्टी के स्तर पर उम्मीदवारों के चयन में स्थानीय समीकरणों और नेताओं की राय को ध्यान में रखना जरूरी था।
वहीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा ने भी पूर्व विधायक मेवाराम जैन के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। जिलाध्यक्ष की ओर से भी पूर्व विधायक के खिलाफ सवाल उठाए गए हैं। दोनों नेताओं के बीच सामने आए मतभेदों से यह संकेत मिल रहा है कि चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर जिम्मेदारी और चुनावी रणनीति को लेकर मंथन का दौर चल रहा है।
निकाय चुनाव के परिणाम किसी भी राजनीतिक दल के लिए स्थानीय संगठन की मजबूती का आकलन करने का मौका होते हैं। ऐसे में बाड़मेर में कांग्रेस के नेताओं के बीच सामने आई सार्वजनिक बयानबाजी ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर प्रत्याशियों के चयन और स्थानीय स्तर पर प्रचार अभियान तक कई मुद्दों को लेकर अब पार्टी के भीतर चर्चा होने की संभावना है।
पूर्व विधायक मेवाराम जैन का अपने ही वार्डों में टिकट वितरण को लेकर नाराजगी जताना भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वार्ड 54, 2 और 1 का उल्लेख करते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा कि प्रत्याशियों के चयन में उनकी राय नहीं ली गई। इससे टिकट वितरण को लेकर पार्टी के अंदर मौजूद मतभेदों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस आपसी विवाद को किस तरह संभालता है। चुनाव परिणामों के बाद संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की होगी। यदि आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो इसका असर आगामी स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
फिलहाल बाड़मेर निकाय चुनाव के बाद कांग्रेस की अंदरूनी कलह सार्वजनिक हो चुकी है। पूर्व विधायक मेवाराम जैन और जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा के बीच सामने आए आरोप-प्रत्यारोप ने पार्टी संगठन में चल रही खींचतान को चर्चा में ला दिया है।
