औद्योगिक प्लांट के केमिकल से लाल हुआ कुएं और तालाब का पानी, हिम्मतसिंह का गढ़ा गांव पर मंडराया उजड़ने का खतरा
बांसवाड़ा शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित हिम्मतसिंह का गढ़ा गांव प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। चारों तरफ हरियाली और पहाड़ियों से घिरे इस गांव में पिछले डेढ़ साल से हालात बदल रहे हैं। ग्रामीणों के सामने अब पानी के दूषित होने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। आरोप है कि औद्योगिक प्लांट से निकलने वाले केमिकल के कारण गांव के कुओं और तालाबों का पानी लाल हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पानी का रंग बदलने के साथ भूगर्भ जल भी दूषित हो रहा है। इससे गांव में पीने और रोजमर्रा के इस्तेमाल के पानी को लेकर चिंता बढ़ गई है। खेती और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों को आशंका है कि यदि प्रदूषण की समस्या पर जल्द रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में गांव में रहना मुश्किल हो सकता है।
हिम्मतसिंह का गढ़ा में पिछले डेढ़ साल से बढ़ रही इस परेशानी ने गांव के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर यह इलाका अब औद्योगिक गतिविधियों के कथित प्रदूषण से प्रभावित हो रहा है।
