बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ क्षेत्र के किसानों को यूरिया संकट का सामना, खुले बाजार में बढ़ी कीमतें
जिले के सज्जनगढ़ क्षेत्र के किसान इन दिनों यूरिया की कमी से परेशान हैं। खरीफ और रबी फसलों की खेती के लिए हर साल क्षेत्र में करीब 20,000 बोरी यूरिया की आवश्यकता होती है, लेकिन बीते छह महीनों में सज्जनगढ़ सहकारी समिति को केवल 1,700 बोरी ही उपलब्ध कराई गई है। इस कमी के कारण किसान मजबूरन खुले बाजार और कालाबाजारी में यूरिया खरीदने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि यूरिया की कमी से खेती प्रभावित हो रही है और उत्पादन लागत बढ़ गई है। "हमारे पास अपनी फसलों के लिए पर्याप्त यूरिया नहीं है। बाजार में यूरिया की कीमत 400 से 500 रुपए प्रति बोरी तक पहुंच गई है। इस बढ़ी हुई कीमत का सीधा असर हमारी जेब पर पड़ रहा है," एक स्थानीय किसान ने बताया।
सहकारी समिति के अधिकारी बताते हैं कि उन्हें समय पर पर्याप्त यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण किसानों को इस कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से इस समस्या को लेकर कई बार पत्राचार किया है, लेकिन समाधान अभी तक नहीं आया है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया की कमी से सिर्फ किसानों की आर्थिक स्थिति ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि यह फसल उत्पादन और गुणवत्ता पर भी गंभीर असर डालती है। "अगर समय पर यूरिया नहीं मिला, तो किसानों को न सिर्फ उत्पादन में कमी का सामना करना पड़ेगा, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। इससे बाजार में फसल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा," एक कृषि विशेषज्ञ ने कहा।
स्थानीय किसान संघ ने इस समस्या को गंभीर मानते हुए प्रशासन और राज्य सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यूरिया की आपूर्ति में इस तरह की लंबी देरी को हल करने के लिए तत्काल नीति बनानी होगी, ताकि किसानों को खेती के लिए आवश्यक खाद समय पर मिल सके।
किसानों की मांग है कि सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया की आपूर्ति में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्हें उचित दरों पर यूरिया उपलब्ध कराया जाए, ताकि खेती प्रभावित न हो और किसानों की आर्थिक स्थिति सुरक्षित रहे।
सज्जनगढ़ क्षेत्र में यूरिया संकट ने किसानों के लिए चिंता बढ़ा दी है। आगामी फसल सीजन में उत्पादन को सुनिश्चित करने और किसानों की आमदनी को सुरक्षित रखने के लिए राज्य प्रशासन और कृषि विभाग की भूमिका अहम हो जाएगी।
इस तरह, बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ क्षेत्र में यूरिया की कमी ने न सिर्फ किसानों की समस्याओं को उजागर किया है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि खेती और खाद्य सुरक्षा के मामलों में समय पर और पर्याप्त आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण है।
