बांसवाड़ा में BAP की हार के बाद बड़ा एक्शन, तीनों निकायों के सभी पदाधिकारी हटाए गए
बांसवाड़ा के तीनों निकायों में भारत आदिवासी पार्टी यानी बीएपी के चुनावी प्रदर्शन और संगठन के भीतर सामने आई खींचतान के बाद पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। पार्टी ने बांसवाड़ा जिले में निकाय चुनाव से जुड़े सभी पदाधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया है। इस संबंध में बीएपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत की ओर से पत्र जारी कर आदेश दिए गए हैं।
नगर निकाय चुनाव के नतीजों में बीएपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद पार्टी के भीतर मंथन शुरू हो गया था। चुनावी प्रदर्शन के साथ संगठन के स्तर पर सामने आई खींचतान ने भी पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचा। इसके बाद अब पार्टी ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए जिले के तीनों निकायों से जुड़े पदाधिकारियों को हटाने का फैसला किया है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत की ओर से जारी पत्र के बाद संगठन में हलचल बढ़ गई है। इस कार्रवाई को निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से आगे संगठन को किस तरह से पुनर्गठित किया जाएगा, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
इस पूरे मामले को लेकर मोहनलाल रोत का कहना है कि पार्टी पदाधिकारियों से जुड़े कुछ विषयों और संगठनात्मक स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। चुनाव के बाद पार्टी के अंदर चल रही गतिविधियों और आपसी खींचतान के बीच नेतृत्व की ओर से यह कदम उठाया गया है।
बांसवाड़ा आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण बीएपी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पार्टी का प्रभाव दक्षिण राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में रहा है। ऐसे में नगर निकाय चुनाव में तीनों निकायों में पार्टी के प्रदर्शन पर संगठन के स्तर पर भी नजर थी। परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने और अंदरूनी खींचतान सामने आने के बाद अब नेतृत्व ने संगठनात्मक बदलाव का रास्ता अपनाया है।
पदाधिकारियों को हटाए जाने के बाद अब पार्टी के सामने अगली चुनौती नए संगठनात्मक ढांचे को तैयार करने की होगी। स्थानीय स्तर पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और संगठन को सक्रिय करने को लेकर जल्द निर्णय लिया जा सकता है। पार्टी के लिए यह जरूरी होगा कि निकाय चुनाव के दौरान सामने आई कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाए।
इस कार्रवाई से यह भी संकेत मिला है कि बीएपी नेतृत्व चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर गंभीर है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से जारी पत्र के बाद अब स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजर अगले आदेशों पर है।
फिलहाल बांसवाड़ा के तीनों निकायों में हार और पार्टी के भीतर खींचतान के बाद बीएपी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत के आदेश के तहत सभी पदाधिकारियों को हटाया गया है। अब देखना होगा कि पार्टी नए सिरे से संगठन का गठन कैसे करती है और आने वाले राजनीतिक मुकाबलों के लिए अपनी रणनीति किस तरह तैयार करती है।
