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बांसवाड़ा के इस गांव में अनूठी होली! परंपराओं और उत्साह के संग जलते अंगारों पर चलते हैं लोग, जानिए क्या है इसकी वजह ?

 
बांसवाड़ा के इस गांव में अनूठी होली! परंपराओं और उत्साह के संग जलते अंगारों पर चलते हैं लोग, जानिए क्या है इसकी वजह ? 

बांसवाड़ा न्यूज़ डेस्क - राजस्थान का वागड़ क्षेत्र अपनी अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यहां होली सिर्फ रंगों का ही नहीं, बल्कि साहस, उत्साह और सामाजिक सौहार्द का भी त्योहार है। जलते अंगारों पर नंगे पांव चलने से लेकर पत्थरों और टमाटरों से लड़ाई तक, वागड़ की होली हर किसी को अचंभित कर देती है।

ढूंढोत्सव: नवजात शिशु के लिए शुभकामनाएं
होली के अवसर पर वागड़ क्षेत्र में ढूंढोत्सव मनाने की परंपरा है। परिवार में नवजात शिशु की पहली होली पर उसे उसके माता-पिता के साथ होलिका दहन स्थल पर ले जाया जाता है। यहां होलिका की विधिवत पूजा और परिक्रमा की जाती है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से बच्चा स्वस्थ और दीर्घायु होता है।

गांवों में गूंजती है ढोल-नगाड़ों की धूम
फाल्गुन माह के आगमन के साथ ही गांवों में ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजने लगती है। गैर नृत्य की भी खूब धूम रहती है, जिसमें युवा पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर नृत्य करते हैं। फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा को रंगों की मस्ती के बीच दो टोलियां एक दूसरे पर कंडा फेंककर राड़ खेलती हैं। यह सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि साहस और धीरज की परीक्षा भी होती है।

टमाटर की राड़: रोमांच का नया रंग
सागवाड़ा कस्बे में होली की दूज से दशमी तक कंडा की राड़ खेली जाती है। यहां के युवा टोलियों में बंटकर एक दूसरे पर कंडा फेंकते हैं। होली के मौके पर टमाटर की राड़ भी खेली जाती है, जिसमें लोग एक दूसरे पर टमाटर फेंककर होली का आनंद लेते हैं।

जलते अंगारों पर चलते हैं श्रद्धालु
बांसवाड़ा के शिवपुरा और डूंगरपुर के कोकापुर में श्रद्धालु होली के अगले दिन जलते अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं। यह नजारा न सिर्फ आस्था और आत्मविश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आस्था के बल पर असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

पत्थर की राड़: साहस और परंपरा का अनूठा संगम
बांसवाड़ा के भीलूड़ा में रघुनाथ मंदिर के पास होली पर पत्थर की राड़ खेली जाती है। इस खेल में दो समूह एक दूसरे पर गुलेल (गोफन) से पत्थर फेंकते हैं। इस खेल में कई लोग घायल भी होते हैं, लेकिन सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी जिंदा है।

भांग में मिर्च मिलाकर गुड़ बांटने की अनूठी परंपरा
वागड़ के सरौदा गांव में होली के मौके पर हर घर से एक किलो गुड़ बांटने की परंपरा है, जो इस त्योहार को और भी मीठा बना देती है। वहीं, भगोरा गांव में भांग में मिर्च मिलाकर प्रसाद बांटा जाता है, जो यहां की अनूठी होली को और भी रोचक बना देता है।

वागड़ की होली का अद्भुत अनुभव
वागड़ की यह अनूठी होली सिर्फ रंगों का त्योहार ही नहीं, बल्कि समाज की एकता, परंपरा और साहस का उत्सव है। कंडो की राड़ से लेकर जलते अंगारों पर चलने तक, यह होली हर किसी को रोमांचित कर देती है। यदि आपने अभी तक वागड़ की होली का अनुभव नहीं लिया है, तो अगली बार इस अद्भुत उत्सव को देखने के लिए अवश्य आएं।