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अलवर में कथा के दौरान इंद्रेश उपाध्याय का बयान, बोले- ईर्ष्या से दूर रहें

 
अलवर में कथा के दौरान इंद्रेश उपाध्याय का बयान, बोले- ईर्ष्या से दूर रहें

अलवर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने प्रवचन देते हुए जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश दिए। इस दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में स्थानीय लोगों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “अलवर वाले कढ़ी-कचौरी खा-खाकर आलसी हो गए हैं।”

हालांकि, उनके इस बयान को उन्होंने हास्य के रूप में प्रस्तुत किया, जिसके बाद उन्होंने अपने प्रवचन में आध्यात्मिक संदेशों पर जोर दिया। इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि ईर्ष्या मनुष्य के कष्ट का सबसे बड़ा कारण है और इससे बचना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कई बार लोग बिना वजह ही दूसरों से ईर्ष्या करने लगते हैं, यहां तक कि धार्मिक कथा सुनाने वाले व्यक्ति से भी। “हम व्यास पीठ पर कथा कर रहे हैं, और कथा करने वाले से ही लोगों को ईर्ष्या हो जाती है। ऐसे-ऐसे ईर्ष्यालु लोग हैं,” उन्होंने कहा। कथावाचक ने आगे कहा कि ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से आगे नहीं बढ़ सकता। उनके अनुसार, “ईर्ष्यालु व्यक्ति इस बात का प्रमाण देता है कि वह कभी ठाकुर जी से नहीं मिल पाएगा।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने मन में ईर्ष्या को स्थान न दें और सकारात्मक सोच अपनाएं।

इंद्रेश उपाध्याय ने यह भी कहा कि जीवन में कुछ दोष आ जाना स्वाभाविक है, लेकिन ईर्ष्या जैसे नकारात्मक भावों से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने मन को शुद्ध रखे और दूसरों के प्रति सद्भावना रखे, तो वह आध्यात्मिक रूप से आगे बढ़ सकता है। कथा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने प्रवचन को ध्यानपूर्वक सुना। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक वातावरण और भक्ति का माहौल बना रहा। कथावाचक के संदेशों को लोगों ने सराहा और उन्हें जीवन में अपनाने की बात कही।