अलवर में SIR प्रक्रिया में फॉर्म बाढ़, वोटर लिस्ट से नाम कटने को लेकर विरोध बढ़ा
अलवर जिले में SIR (Systematic Improvement of Rolls) प्रक्रिया के अंतिम दो-तीन दिनों में वोटर लिस्ट से नाम काटने के हजारों फॉर्म एक साथ आने से विवाद और विरोध बढ़ गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, अलवर, रामगढ़, किशनगढ़, तिजारा और थानागाजी के रिटर्निंग ऑफिसर के चैंबरों में अचानक हजारों फॉर्म जमा हुए, जिससे व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया और राजनीतिक व सामाजिक गहमागहमी शुरू हो गई।
स्थानीय नेताओं और विपक्षी दलों का आरोप है कि आखिरी दिन बड़ी संख्या में फॉर्म जमा करने का काम फर्जीवाड़े और राजनीतिक साजिश के तहत किया गया। उनका कहना है कि इस तरह से कांग्रेस, भाजपा या अन्य राजनीतिक दलों के समर्थकों के वोटर आईडी में गड़बड़ी की जा सकती है।
वोटर लिस्ट से नाम कटने वाले फॉर्मों में बड़ी संख्या में फॉर्म अंतिम दिन अचानक जमा होने के कारण अधिकारियों के लिए सही जांच करना चुनौतीपूर्ण हो गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सभी फॉर्म सही तरीके से सत्यापित किए गए हैं।
चुनाव अधिकारियों ने कहा कि सभी फॉर्मों की जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार किसी भी फर्जीवाड़े की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, रिटर्निंग ऑफिसरों ने कहा कि प्रक्रिया के दौरान आने वाले फॉर्मों को प्राथमिकता के आधार पर सत्यापित किया जाएगा, ताकि किसी योग्य मतदाता को वोट डालने से वंचित न किया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, अन्यथा मतदाता विश्वास प्रभावित हो सकता है। अलवर जिले में जारी विरोध से साफ है कि जनता और राजनीतिक दल इस मामले पर पूरी नजर रखे हुए हैं।
अब प्रशासन और चुनाव आयोग की निगाहें इस पर लगी हैं कि अंतिम दिनों में जमा हुए फॉर्मों की जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
