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बीजेपी ने पुराने चेहरों पर जताया भरोसा, आधी से ज्यादा महिला प्रत्याशियों में दिखा राजनीतिक परिवारों का असर

 
बीजेपी ने पुराने चेहरों पर जताया भरोसा, आधी से ज्यादा महिला प्रत्याशियों में दिखा राजनीतिक परिवारों का असर

अलवर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशियों के चयन में पुराने और राजनीतिक रूप से मजबूत चेहरों पर बड़ा दांव खेला है। पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवारों की प्रोफाइल पर नजर डालने पर महिला प्रत्याशियों में बड़ी संख्या ऐसे परिवारों से आती है, जिनका भाजपा की स्थानीय राजनीति से सीधा जुड़ाव रहा है। इसके चलते टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

भाजपा की सूची में कई महिला प्रत्याशियों को पहली बार चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिला है। इनमें से कई के पति, ससुर या परिवार के अन्य सदस्य पहले से पार्टी संगठन या स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में इन उम्मीदवारों के जरिए पार्टी ने एक तरफ अनुभवी राजनीतिक परिवारों के जनसंपर्क और प्रभाव पर भरोसा जताया है, तो दूसरी ओर महिला आरक्षण के समीकरण को भी साधने की कोशिश की है।

वार्ड 20 से बीना गुर्जर को टिकट

भाजपा ने वार्ड नंबर 20 से बीना गुर्जर को अपना प्रत्याशी बनाया है। बीना गुर्जर के परिवार का स्थानीय राजनीति से पुराना जुड़ाव बताया जा रहा है। वह पूर्व मेयर घनश्याम गुर्जर के एडवोकेट बेटे की पत्नी हैं।

बीना गुर्जर को टिकट मिलने के बाद इस वार्ड में चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक होने के कारण उन्हें स्थानीय स्तर पर संगठन और जनसंपर्क का लाभ मिलने की उम्मीद है।

महिला प्रत्याशियों में परिवारवाद की चर्चा

भाजपा के प्रत्याशी चयन के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महिला उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को लेकर हो रही है। पार्टी ने बड़ी संख्या में महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है, लेकिन इनमें से कई उम्मीदवारों का संबंध पहले से सक्रिय भाजपा नेताओं के परिवारों से है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, स्थानीय निकाय चुनाव में राजनीतिक परिवारों से आने वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के पीछे पार्टी की अपनी रणनीति हो सकती है। ऐसे परिवारों के पास पहले से कार्यकर्ताओं का नेटवर्क, मतदाताओं के बीच पहचान और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों की समझ होती है।

हालांकि, दूसरी ओर पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल भी उठ सकता है कि लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले अन्य दावेदारों की तुलना में राजनीतिक परिवारों से जुड़े उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्यों दी गई।

पुराने चेहरों पर भाजपा का भरोसा

अलवर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने केवल नए चेहरों पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय राजनीति में पहचान रखने वाले परिवारों और पुराने कार्यकर्ताओं को भी प्राथमिकता दी है। पार्टी का लक्ष्य नगर निगम में मजबूत बोर्ड बनाने का है और इसी लिहाज से ऐसे उम्मीदवार चुने गए हैं, जिनकी अपने-अपने वार्ड में पकड़ मानी जाती है।

अब प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद चुनाव प्रचार तेज होगा। भाजपा के सामने जहां अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने की चुनौती है, वहीं टिकट वितरण के बाद संभावित असंतोष को संभालना भी अहम होगा।

अलवर नगर निगम चुनाव में इस बार महिला प्रत्याशियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। ऐसे में राजनीतिक परिवारों से आने वाली महिला उम्मीदवारों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि भाजपा की यह रणनीति चुनावी मैदान में कितनी सफल रहती है।