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बीजेपी-कांग्रेस ने महिलाओं पर जताया भरोसा, भाजपा ने 26 और कांग्रेस ने 24 महिला प्रत्याशी उतारीं

 
बीजेपी-कांग्रेस ने महिलाओं पर जताया भरोसा, भाजपा ने 26 और कांग्रेस ने 24 महिला प्रत्याशी उतारीं

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया का आज अंतिम दिन रहा। नामांकन का समय खत्म होने के साथ ही चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने महिला उम्मीदवारों को खास तवज्जो दी है। कांग्रेस ने जहां 24 महिलाओं को टिकट दिया है, वहीं भाजपा की ओर से 26 महिला प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा गया है।

महिला उम्मीदवारों की बड़ी संख्या से साफ है कि दोनों दलों ने निकाय चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। कई वार्डों में महिला प्रत्याशियों के मैदान में आने से स्थानीय चुनावी समीकरण भी बदल गए हैं। अब इन उम्मीदवारों की जीत-हार का असर नगर निकाय की राजनीति और आगे होने वाले पदाधिकारियों के चुनाव पर भी पड़ सकता है।

भाजपा ने 26 महिलाओं को दिया टिकट

भाजपा ने नगर निकाय चुनाव में 26 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया है। पार्टी ने अनुभवी महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका दिया है। कई उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर लंबे समय से संगठन के साथ जुड़ी हुई हैं, जबकि कुछ पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रख रही हैं।

भाजपा की कोशिश है कि महिला मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाने के साथ ही स्थानीय निकाय में पार्टी की स्थिति मजबूत की जाए।

कांग्रेस ने 24 महिलाओं को उतारा

कांग्रेस ने भी महिला प्रत्याशियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देते हुए 24 महिलाओं को टिकट दिया है। पार्टी ने कई वार्डों में स्थानीय स्तर पर सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का मौका दिया है।

कांग्रेस के सामने इन महिला प्रत्याशियों को जीत दिलाने के साथ संगठन में एकजुटता बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। टिकट वितरण के बाद कुछ स्थानों पर पार्टी के भीतर असंतोष सामने आने की चर्चा है।

टिकट कटने पर दोनों दलों में विरोध

नामांकन प्रक्रिया के दौरान दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट वितरण को लेकर विरोध भी देखने को मिला। कई दावेदारों को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों और स्थानीय नेताओं में नाराजगी सामने आई। कुछ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए, तो कुछ ने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी की।

टिकट वितरण के बाद सामने आया असंतोष दोनों दलों के लिए चुनौती बन सकता है। खासकर उन वार्डों में जहां मजबूत दावेदार टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं, वहां बागी उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के वोट काट सकते हैं।

अब प्रचार अभियान होगा तेज

नामांकन का अंतिम दिन खत्म होने के बाद अब चुनाव प्रचार जोर पकड़ने की उम्मीद है। प्रत्याशी अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान तेज करेंगे। स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ महिला सुरक्षा, सफाई, सड़क, पानी, सीवरेज और विकास कार्य चुनाव प्रचार के प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं।

अब नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी के बाद चुनावी मैदान की अंतिम तस्वीर सामने आएगी। इसके बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरी ताकत लगाएंगी। महिला प्रत्याशियों की बड़ी संख्या के चलते इस बार नगर निकाय चुनाव में महिला मतदाताओं की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।