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बीजेपी-कांग्रेस पार्षदों की बाड़ेबंदी आज से: अलवर से बाहर ले जाने की तैयारी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय पर हुई बैठक

 
बीजेपी-कांग्रेस पार्षदों की बाड़ेबंदी आज से: अलवर से बाहर ले जाने की तैयारी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय पर हुई बैठक

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद अब अलवर में नगर सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। चुनाव परिणामों और संभावित राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की तैयारी शुरू कर दी है। दोनों दलों की ओर से पार्षदों की बाड़ेबंदी आज से शुरू होने की संभावना है।सूत्रों के अनुसार, पार्षदों को अलवर से बाहर ले जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि चुनावी जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को रोका जा सके।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में हुई बैठक

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बीती रात केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में भाजपा नेताओं की बैठक हुई। बैठक में नगर निकाय चुनाव के नतीजों और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की गई।भाजपा की ओर से पार्षदों को एकजुट रखने और बोर्ड बनाने के लिए संभावित समीकरणों पर मंथन किया गया।

कांग्रेस भी सक्रिय, पार्षदों को संभालने की तैयारी

वहीं, कांग्रेस भी अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी की कोशिश है कि उसके जीते हुए पार्षद एकजुट रहें और किसी भी तरह की सेंधमारी से बचाया जा सके।निकाय चुनावों में अक्सर बहुमत के करीब पहुंचने वाले दलों के बीच निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो जाती है। ऐसे में दोनों प्रमुख दल निर्दलीयों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

निर्दलीय तय कर सकते हैं समीकरण

अलवर नगर निकाय चुनाव में यदि भाजपा या कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।दोनों दल अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं। यही वजह है कि चुनाव परिणाम के बाद से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

अलवर में बोर्ड बनाने की जंग तेज

अब सभी की नजरें चुनावी नतीजों और उसके बाद बनने वाले समीकरणों पर टिकी हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही नगर निकाय में अपना बोर्ड बनाने का दावा कर रहे हैं।आने वाले दिनों में पार्षदों की संख्या, निर्दलीयों का रुख और पार्टी की रणनीति यह तय करेगी कि अलवर नगर निकाय की कमान किसके हाथों में जाती है।