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अलवर निकाय चुनाव में बड़ा झटका: स्क्रूटनी में 132 नामांकन खारिज, कई दिग्गज प्रत्याशी बाहर

 
अलवर निकाय चुनाव में बड़ा झटका: स्क्रूटनी में 132 नामांकन खारिज, कई दिग्गज प्रत्याशी बाहर

अलवर में नगरीय निकाय चुनाव 2026 की नामांकन जांच प्रक्रिया के दौरान बड़ा विवाद सामने आया है। स्क्रूटनी के दौरान बड़ी संख्या में नामांकन पत्र खारिज होने से चुनावी माहौल गरमा गया है। निर्वाचन विभाग की जांच में कुल 132 नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए हैं। नामांकन खारिज होने वालों में कई चर्चित और प्रमुख चेहरे भी शामिल हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

स्क्रूटनी में जिन प्रमुख नामों को झटका लगा है, उनमें वार्ड संख्या-52 की पूर्व सभापति शकुंतला सोनी, इसी वार्ड की चर्चित महिला नेता अंजना दीवान, जिन्हें ‘हिंदू शेरनी’ के नाम से भी पहचाना जाता है, शामिल हैं। इसके अलावा वार्ड-53 से जयपुर DTO ग्रेस कुमार और वार्ड-58 से कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत अग्रवाल का नामांकन भी जांच के दौरान खारिज कर दिया गया है।

नामांकन पत्रों के निरस्त होने के बाद कई वार्डों में चुनावी समीकरण बदल गए हैं। राजनीतिक दलों के सामने अब नए सिरे से रणनीति बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है। खासतौर पर उन उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है, जो लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे थे और मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके थे।

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच निर्धारित नियमों और दस्तावेजों के आधार पर की गई। जिन पर्चों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी, तकनीकी खामियां या चुनाव नियमों के अनुरूप कमियां पाई गईं, उन्हें नियमानुसार निरस्त किया गया।

वहीं, नामांकन खारिज होने के बाद कुछ उम्मीदवारों और समर्थकों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। कई दावेदार अब निर्वाचन प्रक्रिया के नियमों और जांच के आधार को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है।

अब उम्मीदवारों के पास नाम वापसी का अवसर रहेगा। नाम वापसी की समय सीमा पूरी होने के बाद चुनाव मैदान में बचे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। इसके बाद चुनाव चिन्ह आवंटित होंगे और प्रचार अभियान तेज हो जाएगा।

अलवर नगर निकाय चुनाव में इस बार भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है। नामांकन खारिज होने के बाद कई वार्डों में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। अब सभी की नजरें नाम वापसी और अंतिम प्रत्याशी सूची पर टिकी हुई हैं।