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अलवर नगर निगम चुनाव: कांग्रेस की बाड़ेबंदी वाले रिसॉर्ट में हंगामा, मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज

 
अलवर नगर निगम चुनाव: कांग्रेस की बाड़ेबंदी वाले रिसॉर्ट में हंगामा, मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज

नगर निगम चुनाव के बाद मेयर और बोर्ड गठन को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच शुक्रवार को जयपुर के तूंगा स्थित एक रिसॉर्ट में जमकर हंगामा होने की बात सामने आई है। यहां कांग्रेस ने अपने पार्षद प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर रखी थी।

मतदान के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद में जुटे हुए हैं। बोर्ड बनाने के लिए जरूरी संख्या बल जुटाने और संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए पार्टियां अपने पार्षद प्रत्याशियों पर नजर बनाए हुए हैं।

रिसॉर्ट में प्रत्याशियों को रखा गया

कांग्रेस ने अपने पार्षद प्रत्याशियों को जयपुर के तूंगा स्थित एक रिसॉर्ट में रखा हुआ था। इसी दौरान वहां किसी बात को लेकर हंगामा हो गया। हालांकि, हंगामे की वजह को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

बताया जा रहा है कि पार्टी चुनाव परिणाम आने तक अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति के तहत रिसॉर्ट में ठहरा रही है। कांग्रेस नेताओं की ओर से भी लगातार प्रत्याशियों से संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

मेयर की कुर्सी को लेकर मुकाबला

अलवर नगर निगम में मेयर पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद बोर्ड गठन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें पार्षदों की भूमिका सबसे अहम होगी।

अगर किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे में एक-एक पार्षद का समर्थन दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

क्रॉस वोटिंग का डर

निकाय चुनावों में अक्सर बोर्ड गठन के समय राजनीतिक समीकरण बदलते देखे जाते हैं। इसी वजह से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।

अब सभी की निगाहें मतगणना और उसके बाद बनने वाले समीकरणों पर टिकी हैं। अलवर नगर निगम की सत्ता किसके हाथों में जाएगी, इसका फैसला चुनाव परिणाम आने के बाद ही होगा।