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हीमाेफीलिया के मरीजाें पर संकट: अलवर के जिला अस्पताल में खून में थक्का जमाने वाले इंजेक्शन 3 दिन से खत्म
 

अलवर न्यूज़ डेस्क, हीमोफीलिया के मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। दवा प्रबंधन विफल होने पर ब्लड क्लॉटिंग फैक्टर-8 इंजेक्शन के इंजेक्शन जिला फार्मेसियों से खत्म हो गए हैं। जिला अस्पताल के स्टार ने चार माह से व्यवस्था ठप होने के कारण 3 दिन से इंजेक्शन नहीं लगाया है।

यह आपातकालीन इंजेक्शन उपलब्ध न होने के कारण हीमोफीलिया के मरीज अस्पताल से लौट रहे हैं या निजी अस्पतालों में सरकारी आपूर्ति में यह एक मुफ्त इंजेक्शन 10,000 से 12,000 रुपये में खरीदने को मजबूर हैं। यह इंजेक्शन अलवर बाजार में भी उपलब्ध नहीं है, जहां एक मरीज को एक बार में 5 से 10 इंजेक्शन लेने पड़ते हैं।

कीमोथेरेपी सहित कैंसर की दवाएं भी शुरू की गईं

जिला अस्पताल ने पॉक्लिटैक्सेल, कैंसर रोगियों के लिए कीमोथेरेपी, स्तन कैंसर, फेफड़ों के कैंसर और हीमोफिलिया रोगियों के लिए फैक्टर -8 सहित 16 दवाओं की आपूर्ति करने में अपनी असमर्थता का संकेत दिया है। इसमें पोलीटैक्सेल 100 मिलीग्राम, कार्बाप्लाटिन 450 मिलीग्राम।

इसमें साइक्लोफेनैमाइड 500 मिलीग्राम, डॉक्सैरूबिसिन 50 मिलीग्राम, एटापेसिड 100 मिलीग्राम, फ्लोरेसिन 100 मिलीग्राम, जेमिसिटाबाइन 1 मिलीग्राम, सिस्प्लैटिन 50 मिलीग्राम सहित 16 दवाएं शामिल हैं। एक सितंबर से इन दवाओं की किल्लत है, जब जिला अस्पताल में 12 से 15 मरीज ओपीडी में हैं और 4-5 मरीज हर दिन कीमोथैरेपी से गुजर रहे हैं।
रोगी की मृत्यु हो सकती है

फैक्टर-8 हीमोफीलिया के मरीजों के लिए आपातकालीन दवा है। इसकी कमी रागी के लिए घातक हो सकती है। नाक और त्वचा से सामान्य रक्तस्राव बंद हो जाता है, लेकिन अगर पेट, घुटनों या मस्तिष्क में रक्तस्राव होता है और तुरंत इंजेक्शन नहीं दिया जाता है तो यह घातक हो सकता है।

क्रायोप्रेसिपिटेट का आधान कारक 8 के इंजेक्शन के तुरंत बाद थक्के से राहत दे सकता है या रक्तस्राव को रोक सकता है। लेकिन क्रायोप्रिसिपिटेट किसी भी ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं है और फैक्टर-8 इंजेक्शन बाजार में उपलब्ध नहीं है। रागी की स्थिति के आधार पर 5 से 10 इकाइयाँ लगाई जा सकती हैं, जिनकी कीमत 50 हजार से 1 लाख रुपये तक होती है। - डॉ दीपेश गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ