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सरिस्का के जंगल में दिखे 3 नए शावक, टाइगरों की संख्या बढ़कर 52 हुई

 
सरिस्का के जंगल में दिखे 3 नए शावक, टाइगरों की संख्या बढ़कर 52 हुई

राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। सरिस्का के जंगल में तीन नए टाइगर शावक उछल-कूद करते हुए नजर आए हैं। इन शावकों की उम्र करीब एक महीने बताई जा रही है। इनके साथ दिखने के बाद अब सरिस्का में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या मानी जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाल ही में जंगल के अंदर निगरानी के दौरान ये तीनों शावक अपनी मां के साथ देखे गए। कैमरा ट्रैप और वनकर्मियों की निगरानी में इनकी गतिविधियां सामने आईं, जिसमें शावक जंगल में खेलते और इधर-उधर दौड़ते दिखाई दिए। शावकों के स्वस्थ होने से वन विभाग के अधिकारी भी उत्साहित हैं।

सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में बाघों के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। यही वजह है कि सरिस्का में टाइगरों की संख्या बढ़कर 52 तक पहुंच गई है, जो अब तक का रिकॉर्ड आंकड़ा माना जा रहा है।

हालांकि टाइगरों की संख्या बढ़ना वन विभाग के लिए खुशी की बात है, लेकिन इसके साथ ही नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी चुनौती सभी टाइगरों को पर्याप्त क्षेत्र और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। बढ़ती संख्या के कारण सरिस्का प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर टाइगर को जंगल में पर्याप्त जगह मिल सके और उनके बीच क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति न बने।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टाइगरों की निगरानी के लिए लगातार कैमरा ट्रैप और गश्त की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उनके मूवमेंट पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की समस्या होने पर समय रहते कदम उठाए जा सकें।

सरिस्का में टाइगरों की बढ़ती संख्या को संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह संरक्षण और निगरानी जारी रही तो आने वाले समय में सरिस्का टाइगर रिजर्व वन्यजीवों के लिए और भी सुरक्षित आवास बन सकता है।

फिलहाल तीन नए शावकों के दिखाई देने से वन विभाग और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह है। वहीं प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि बढ़ती टाइगर आबादी के लिए जंगल में बेहतर प्रबंधन और पर्याप्त क्षेत्र सुनिश्चित किया जाए।