पुष्कर में स्थित भगवान शिव के इस मंदिर में शिवरात्रि पर उमड़ आता है जान सैलाब, पांडवों से है गहरा नाता
अजमेर न्यूज़ डेस्क - पुष्कर के मध्य स्थित नागपहाड़ी पर 4500 वर्ष पुराना पांडेश्वर महादेव मंदिर है। यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के पुजारी केशव गिरी बताते हैं कि महाभारत के बाद पांडव पिंडदान करने के उद्देश्य से कई महीनों तक नागपहाड़ी पर रुके थे। उन्होंने यहां पंच कुंड बनाए थे। यहीं रहकर पांडवों ने सोमवती अमावस्या का इंतजार किया था।
पांडवों ने दिया था सोमवती अमावस्या का श्राप
पांडवों को बताया गया था कि वे केवल द्वापर युग में ही धरती पर रह सकते हैं। यदि कलियुग शुरू हो गया तो उन्हें धरती पर ही रहना पड़ेगा। पिंडदान के लिए सोमवती अमावस्या शुभ समय था। कई दिनों तक इंतजार करने के बाद भी जब सोमवती अमावस्या नहीं आई तो पांडवों ने सोमवती अमावस्या को श्राप दिया कि यह साल में कई बार आएगी। इसके बाद पांडव द्वापर युग के अंत से पहले पिंडदान किए बिना ही इस स्थान से चले गए। यह स्थान आज भी पांडवेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। पांडवों के आगमन के बाद इस स्थान का नाम पंचकुंड पड़ा।
पहाड़ियों के बीच स्थित है मंदिर
अजमेर से 15 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ता है। शिवरात्रि के अलावा सावन के महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है। खासकर सावन के सोमवार को दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। चूंकि मंदिर पहाड़ी क्षेत्र के बीच में स्थित है, इसलिए आसपास के इलाके की हरियाली और बारिश के मौसम में पहाड़ों से बहते झरने इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं।
