अजमेर में पंचायती राज चुनाव की तारीखों में बदलाव, धनतेरस के चलते बदला दो चरणों का शेड्यूल
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम में बदलाव किया है। धनतेरस के पर्व को देखते हुए अजमेर जिले में दो चरणों में होने वाले पंचायती राज चुनाव की तारीखों में संशोधन किया गया है। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद संबंधित क्षेत्रों में मतदान और चुनावी तैयारियों का कार्यक्रम भी नई तारीखों के अनुसार होगा।
धनतेरस के चलते लिया गया फैसला
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम में बदलाव का फैसला धनतेरस के पर्व को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पहले जिन तारीखों पर मतदान प्रस्तावित था, उनमें संशोधन किया गया है। आयोग का उद्देश्य त्योहार के दौरान मतदाताओं, प्रत्याशियों और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों को होने वाली संभावित परेशानी को कम करना है।
अजमेर जिले में पंचायती राज चुनाव दो चरणों में होने हैं। अब इन दोनों चरणों से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया संशोधित कार्यक्रम के अनुसार पूरी की जाएगी।
प्रत्याशियों और प्रशासन को करनी होगी नई तैयारी
चुनाव की तारीखों में बदलाव के बाद प्रत्याशियों को भी अपने चुनाव प्रचार और अन्य तैयारियों में बदलाव करना होगा। वहीं प्रशासन और निर्वाचन विभाग के अधिकारियों को मतदान दलों की रवानगी, मतदान केंद्रों की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और अन्य तैयारियां नई तारीखों के हिसाब से करनी होंगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव को लेकर पहले से ही तैयारियां चल रही थीं। तारीख बदलने के बाद संबंधित पंचायत क्षेत्रों में प्रत्याशियों और मतदाताओं के बीच भी नए शेड्यूल को लेकर जानकारी साझा की जा रही है।
मतदान के साथ मतगणना कार्यक्रम पर भी नजर
पंच और सरपंच पद के लिए होने वाले चुनाव में मतदान के बाद मतगणना की प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी। तारीखों में बदलाव के बाद संबंधित क्षेत्रों में मतदान और मतगणना से जुड़ी प्रक्रिया संशोधित कार्यक्रम के तहत होगी।
चुनाव आयोग के इस फैसले से अजमेर जिले के उन ग्रामीण इलाकों पर सीधा असर पड़ेगा, जहां पहले और दूसरे चरण में चुनाव होने हैं। अब प्रत्याशियों और मतदाताओं को आयोग की ओर से जारी नई तारीखों के अनुसार ही चुनावी कार्यक्रम पर ध्यान देना होगा।
धनतेरस जैसे प्रमुख त्योहार को देखते हुए चुनाव कार्यक्रम में किया गया यह बदलाव प्रशासन और मतदाताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
