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अजमेर नगर निगम में किसी दल को बहुमत नहीं, मेयर-डिप्टी मेयर के लिए निर्दलीय पार्षद होंगे निर्णायक

 
अजमेर नगर निगम में किसी दल को बहुमत नहीं, मेयर-डिप्टी मेयर के लिए निर्दलीय पार्षद होंगे निर्णायक

अजमेर नगर निगम के पार्षद चुनाव के नतीजों ने शहर की राजनीति में नया समीकरण बना दिया है। चुनाव परिणाम में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही दल बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में अब नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर का पद हासिल करने के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी।

पार्षद चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद किसी भी एक दल के पक्ष में स्पष्ट बहुमत नहीं होने से बोर्ड गठन की तस्वीर फिलहाल साफ नहीं है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने उम्मीदवारों को मेयर और डिप्टी मेयर बनाने की कोशिश में जुटेंगे। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है।

नगर निगम में बहुमत नहीं मिलने के कारण भाजपा और कांग्रेस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने पक्ष में पर्याप्त पार्षदों का समर्थन जुटाना होगी। दोनों दल निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साध सकते हैं। निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के बिना किसी भी दल के लिए अपने दम पर बोर्ड का गठन करना आसान नहीं होगा।

चुनाव परिणाम के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। दोनों प्रमुख दल अपने-अपने स्तर पर पार्षदों को साथ लाने की रणनीति तैयार करेंगे। वहीं निर्दलीय पार्षद भी मौजूदा स्थिति में अहम भूमिका में आ गए हैं। उनके समर्थन से ही मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव का समीकरण तय हो सकता है।

अजमेर नगर निगम के मेयर पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर रहेगी। दोनों दल यह कोशिश करेंगे कि अधिक से अधिक निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में किया जा सके। हालांकि निर्दलीय पार्षद किस दल का समर्थन करते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

इस तरह अजमेर नगर निगम का बोर्ड गठन इस बार सीधी बहुमत की बजाय समर्थन और राजनीतिक सहमति पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है। पार्षदों के चुनाव परिणाम के बाद अब मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

निर्दलीय पार्षदों की संख्या और उनका रुख आने वाले दिनों में नगर निगम की राजनीति की दिशा तय करेगा। यदि निर्दलीय पार्षद किसी एक दल के पक्ष में पर्याप्त संख्या में जाते हैं तो उस दल के लिए मेयर और डिप्टी मेयर बनाना आसान हो जाएगा। वहीं समर्थन बंटने की स्थिति में मुकाबला और भी रोचक हो सकता है।

अजमेर नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर पाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के सामने अब संगठन के साथ-साथ राजनीतिक प्रबंधन की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और पार्षदों के बीच बातचीत से यह तय होगा कि नगर निगम की सत्ता किसके हाथ में जाती है।