16 साल पहले लापता हुए दो बच्चों की AI से बनाई नई तस्वीरें, अब अजमेर GRP को तलाश; बचपन की फोटो से तैयार किया चेहरा
राजस्थान में करीब 16 साल पहले लापता हुए दो बच्चों की तलाश के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जा रही है। अजमेर जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) ने बच्चों के बचपन की तस्वीरों के आधार पर उनके संभावित वर्तमान चेहरे तैयार किए हैं। समय बीतने के साथ बच्चों के चेहरे में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए यह तकनीक अपनाई गई है, ताकि उनकी पहचान करने और तलाश को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके।
बचपन की तस्वीरों से तैयार किए गए नए चेहरे
लंबे समय से लापता बच्चों की तलाश में सबसे बड़ी चुनौती उनकी वर्तमान शक्ल-सूरत का पता लगाना होती है। बचपन में ली गई तस्वीरें कई साल बाद पहचान के लिए पर्याप्त साबित नहीं होतीं, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ चेहरे की बनावट में काफी बदलाव आ जाता है।
इसी चुनौती को देखते हुए अजमेर जीआरपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से दोनों बच्चों के संभावित वर्तमान चेहरे तैयार किए हैं। इसके लिए उनके बचपन की उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। इन तस्वीरों के आधार पर तकनीक की मदद से यह अनुमान लगाने का प्रयास किया गया है कि बड़े होने के बाद दोनों बच्चे कैसे दिखाई दे सकते हैं।
16 साल से लापता हैं दोनों बच्चे
जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चे करीब 16 साल पहले लापता हुए थे। इतने लंबे समय तक उनका पता नहीं चल पाने के कारण उनकी तलाश पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। अब नई तकनीक के इस्तेमाल से उनकी पहचान से जुड़े सुराग मिलने की उम्मीद की जा रही है।
हालांकि, बच्चों के लापता होने की परिस्थितियों, उनकी उम्र, नाम और आखिरी बार कहां देखे जाने जैसे विवरणों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने रखी जा सकती है।
तलाश में मददगार साबित हो सकती है AI तकनीक
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब पुलिस जांच और पहचान से जुड़े मामलों में भी किया जा रहा है। पुरानी तस्वीरों के आधार पर किसी व्यक्ति के संभावित वर्तमान चेहरे की छवि तैयार करना इस तकनीक का एक उपयोग है।
लंबे समय से लापता लोगों के मामलों में ऐसी तस्वीरें पहचान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति को नई तस्वीर से मिलता-जुलता चेहरा दिखाई देता है, तो वह पुलिस को जानकारी दे सकता है। इससे जांच एजेंसियों को नए सुराग मिलने की संभावना रहती है।
हालांकि, AI से तैयार की गई तस्वीर किसी व्यक्ति के वास्तविक वर्तमान चेहरे की गारंटी नहीं होती। इसमें अंतर संभव है, इसलिए तस्वीरों को पहचान के लिए एक संभावित संदर्भ के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
लोगों की जानकारी से मिल सकता है सुराग
दोनों बच्चों की तलाश में आम लोगों से मिलने वाली जानकारी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि पुलिस की ओर से नई तस्वीरें और आधिकारिक संपर्क विवरण जारी किए जाते हैं, तो लोग संबंधित सूचना सीधे पुलिस तक पहुंचा सकते हैं।
16 साल पुराने इस मामले में AI तकनीक की मदद से तैयार किए गए संभावित चेहरों के जरिए तलाश को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस तकनीक से जांच में कोई नया सुराग मिलता है या नहीं।
नोट: खबर प्रकाशित करने से पहले दोनों बच्चों के नाम, लापता होने की तारीख, उम्र, AI तस्वीरों की आधिकारिक उपलब्धता और अजमेर GRP के संपर्क विवरण की पुष्टि जरूर करें।
