निकाय चुनाव-2026 में बदली प्रत्याशियों की तस्वीर, दो से ज्यादा बच्चों वाले भी उतरे मैदान में
राजस्थान में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव-2026 में इस बार प्रत्याशियों की तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है। लंबे समय से लागू दो से ज्यादा बच्चों वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी हटने के बाद अब ऐसे कई उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में दिखाई दे रहे हैं, जो पहले इस नियम के कारण चुनावी राजनीति से दूर थे।
राज्य सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया में बदलाव के बाद अब नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका चुनावों में उम्मीदवारों की पात्रता तय करते समय संतान की संख्या को आधार नहीं बनाया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने के इच्छुक कई लोगों के लिए रास्ता खुल गया है।दरअसल, राजस्थान में पहले नियम था कि जिन लोगों की दो से अधिक संतान होती थी, वे नगरीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाते थे। यह प्रावधान करीब तीन दशक पहले लागू किया गया था। अब इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है, जिसके बाद बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
इस बदलाव का असर टिकट वितरण से लेकर चुनावी समीकरणों तक दिखाई दे रहा है। राजनीतिक दलों को भी अब उम्मीदवार चयन के लिए ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं। वहीं, कई पुराने कार्यकर्ता और स्थानीय नेता, जो पहले नियम के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते थे, अब अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।निकाय चुनावों में इस बार अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों की संख्या भी बढ़ी है। कई वार्डों में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, युवा नेता और लंबे समय से संगठन से जुड़े कार्यकर्ता चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दो से ज्यादा बच्चों वाली बाध्यता हटने से स्थानीय राजनीति में भागीदारी का दायरा बढ़ेगा। हालांकि, चुनाव में जीत का फैसला उम्मीदवार की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दों और जनता के समर्थन पर निर्भर करेगा।अब नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि इस बदलाव का चुनावी मैदान पर कितना असर पड़ा है। लेकिन इतना तय है कि निकाय चुनाव-2026 में प्रत्याशियों की सूची पहले के मुकाबले ज्यादा विविध और बदली हुई नजर आ रही है।
