अजमेर में दंपती ने गोद लिए बच्चे को ‘गोद मुक्त’ कराने की मांग की, सिविल लाइंस थाने पहुंचा मामला
राजस्थान के अजमेर जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक दंपती ने गोद लिए हुए बच्चे को वापस सरकारी संरक्षण में देने की मांग की है। इस संबंध में दंपती सिविल लाइंस थाने पहुंचा और बच्चे को ‘गोद मुक्त’ कर बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन या किसी अन्य राजकीय संस्था को सौंपने की बात कही। हालांकि पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय दंपती से गोद लेने से जुड़े कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दंपती ने कुछ समय पहले एक बालक को विधिवत गोद लिया था। लेकिन अब पारिवारिक या अन्य कारणों के चलते वे बच्चे की जिम्मेदारी निभाने में असमर्थता जता रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने बच्चे को सरकारी देखरेख में भेजने की इच्छा जताई। दंपती सीधे सिविल लाइंस थाने पहुंचे और पुलिस को अपनी स्थिति से अवगत कराया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दंपती से गोद लेने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े कागजात, जैसे दत्तक ग्रहण प्रमाण पत्र और अन्य कानूनी दस्तावेज पेश करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि गोद लेने और छोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और संवेदनशील होती है, जिसे नियमानुसार ही पूरा किया जा सकता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि बिना दस्तावेजों और बाल कल्याण समिति के निर्देशों के बच्चे को किसी भी संस्था में नहीं भेजा जा सकता। इसके लिए संबंधित विभागों की अनुमति और उचित प्रक्रिया जरूरी है। मामले की सूचना बाल कल्याण समिति (CWC) को भी दी जा सकती है, ताकि बच्चे के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे का निर्णय लिया जा सके।
इस घटना ने सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दत्तक ग्रहण एक जिम्मेदारी भरा निर्णय होता है और बच्चे के मानसिक व भावनात्मक विकास पर ऐसे कदमों का गहरा असर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में बेहद संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
फिलहाल पुलिस दंपती से आवश्यक दस्तावेजों का इंतजार कर रही है। दस्तावेजों की जांच और संबंधित एजेंसियों से परामर्श के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए ही कोई फैसला लिया जाएगा।
