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अजमेर नगर निगम चुनाव में जेन-ज़ी की एंट्री, भाजपा-कांग्रेस ने उतारे युवा चेहरे; सिर्फ 5-5 फीसदी उम्मीदवार इस एज ग्रुप से

 
अजमेर नगर निगम चुनाव में जेन-ज़ी की एंट्री, भाजपा-कांग्रेस ने उतारे युवा चेहरे; सिर्फ 5-5 फीसदी उम्मीदवार इस एज ग्रुप से

अजमेर नगर निगम चुनाव इस बार कई मायनों में खास नजर आ रहा है। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय अनुभवी चेहरों के साथ अब नई पीढ़ी यानी जेन-ज़ी (Generation Z) को भी चुनावी मैदान में उतारा गया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने युवाओं को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है, हालांकि जेन-ज़ी उम्मीदवारों की संख्या अभी भी सीमित है।

चुनावी आंकड़ों के अनुसार, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में करीब 5-5 प्रतिशत उम्मीदवार ही जेन-ज़ी आयु वर्ग से जुड़े हुए हैं। यानी कुल उम्मीदवारों में इस नई पीढ़ी की भागीदारी कम है, लेकिन उनकी मौजूदगी ने चुनावी चर्चा जरूर बढ़ा दी है।

जेन-ज़ी में आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोगों को शामिल किया जाता है। यह पीढ़ी डिजिटल तकनीक, सोशल मीडिया और नई सोच के लिए जानी जाती है। ऐसे में राजनीतिक दलों ने युवाओं को मौका देकर बदलते मतदाता वर्ग को साधने की कोशिश की है।

अजमेर नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को भी मौका दिया है। अनुभवी उम्मीदवार जहां अपने राजनीतिक अनुभव और जनसंपर्क के दम पर मैदान में हैं, वहीं युवा प्रत्याशी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और डिजिटल माध्यमों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दे सबसे ज्यादा प्रभाव डालते हैं। सड़क, पानी, सफाई, रोजगार और शहर के विकास जैसे मुद्दों पर युवा उम्मीदवारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। जेन-ज़ी उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अनुभव की कमी को पूरा करते हुए मतदाताओं का भरोसा जीतना होगी।

वहीं, राजनीतिक दलों के लिए भी युवाओं को आगे बढ़ाना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा मतदाता होने के कारण पार्टियां नई पीढ़ी को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

हालांकि, इस बार अजमेर नगर निगम चुनाव में जेन-ज़ी उम्मीदवारों की संख्या कम है, लेकिन उनकी मौजूदगी यह संकेत देती है कि आने वाले समय में स्थानीय राजनीति में युवा चेहरों की भूमिका बढ़ सकती है। अब देखना होगा कि मतदाता अनुभवी नेताओं के साथ-साथ इन नए और युवा चेहरों पर कितना भरोसा जताते हैं।