अजमेर में ई-रिक्शा चालकों की मांग तेज: स्थायी स्टैंड नहीं होने से बढ़ी परेशानी, बोले- सड़क किनारे खड़ा करने पर कट रहे चालान
राजस्थान के अजमेर शहर में ई-रिक्शा चालकों ने स्थायी स्टैंड की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। चालकों का कहना है कि शहर में ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं। इसके चलते ट्रैफिक पुलिस चालान काट रही है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।
ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि वे रोजाना सैकड़ों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाते हैं, लेकिन शहर में उनके लिए कोई स्थायी पार्किंग या स्टैंड की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सवारी का इंतजार करने के लिए उन्हें सड़क किनारे ही ई-रिक्शा खड़ा करना पड़ता है। इसी दौरान ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई करते हुए चालान जारी कर देती है।
चालकों का कहना है कि वे नियमों का उल्लंघन जानबूझकर नहीं करते, बल्कि स्टैंड की सुविधा नहीं होने के कारण उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। उनका कहना है कि एक ओर प्रशासन शहर में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर ई-रिक्शा चालकों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
ई-रिक्शा चालक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि शहर के प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल और अन्य व्यस्त स्थानों के आसपास स्थायी ई-रिक्शा स्टैंड बनाए जाएं। इससे न केवल चालकों को राहत मिलेगी, बल्कि यातायात व्यवस्था भी अधिक सुव्यवस्थित होगी और यात्रियों को भी आसानी से ई-रिक्शा उपलब्ध हो सकेंगे।
चालकों का यह भी कहना है कि बार-बार चालान कटने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। अधिकांश चालक ई-रिक्शा की किश्त भरकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। ऐसे में लगातार जुर्माना लगने से आर्थिक संकट और गहरा रहा है।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि शहर में ई-रिक्शा स्टैंड की व्यवस्था होने से सड़क किनारे लगने वाली अव्यवस्था कम होगी और ट्रैफिक संचालन बेहतर हो सकेगा। साथ ही यात्रियों को भी निर्धारित स्थानों पर आसानी से ई-रिक्शा मिल सकेंगे।
फिलहाल ई-रिक्शा चालकों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से जल्द स्थायी स्टैंड बनाने तथा चालान की समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन करने को भी मजबूर हो सकते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी मांगों पर क्या कदम उठाता है।
