केकड़ी नेमिनाथ मंदिर में धर्मसभा: मुनि प्रज्ञान सागर ने दान और सेवा के महत्व पर दिया संदेश
राजस्थान के केकड़ी में स्थित नेमिनाथ मंदिर में रविवार को एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस अवसर पर धार्मिक वातावरण में जिनाभिषेक और शांतिधारा जैसे पवित्र अनुष्ठान भी विधि-विधान से संपन्न कराए गए।
कार्यक्रम में जैन संत Munish Pragyasagar ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दान और सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में दान केवल धन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय, सेवा और सद्भावना के रूप में भी किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को समाज में करुणा, संयम और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
यह आयोजन Neminath Temple में धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ, जहां भक्तों ने भगवान के समक्ष पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक शांति की कामना की। जिनाभिषेक और शांतिधारा अनुष्ठानों के दौरान वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालुओं ने धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच आस्था व्यक्त की।
मुनि प्रज्ञान सागर ने अपने प्रवचन में यह भी कहा कि सेवा भाव मनुष्य के जीवन को ऊंचा उठाता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनता है। उन्होंने युवाओं को भी धर्म और नैतिक मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भक्तों ने पूरे श्रद्धा भाव से अनुष्ठानों में भाग लिया और इसे एक आध्यात्मिक अनुभव बताया।
स्थानीय आयोजकों के अनुसार, इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम समाज में एकता और सकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं और लोगों को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित करते हैं।
धर्मसभा के समापन पर सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया गया और प्रसाद वितरण भी किया गया।
