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5 साल के बच्चे भी पीठ दर्द से परेशान, 14 साल की उम्र में डिस्क की समस्या: बार-बार CT स्कैन से रेडिएशन का खतरा, कोविड के बाद बढ़े मामले

 
5 साल के बच्चे भी पीठ दर्द से परेशान, 14 साल की उम्र में डिस्क की समस्या: बार-बार CT स्कैन से रेडिएशन का खतरा, कोविड के बाद बढ़े मामले

आजकल कम उम्र के बच्चों में भी पीठ और कमर दर्द की समस्या देखने को मिल रही है। पहले ऐसी परेशानियां आमतौर पर अधिक उम्र के लोगों में सामने आती थीं, लेकिन अब 5 साल तक के बच्चे भी पीठ दर्द की शिकायत कर रहे हैं। कुछ मामलों में 14 साल की उम्र में ही बच्चों में स्लिप डिस्क जैसी समस्याएं सामने आने की बात कही जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों की बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और लंबे समय तक मोबाइल या स्क्रीन के इस्तेमाल को इसकी संभावित वजहों में शामिल किया जा रहा है।

कोविड महामारी के बाद बच्चों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया। लंबे समय तक घर में रहना, ऑनलाइन पढ़ाई और खेलकूद में कमी के कारण कई बच्चों की शारीरिक सक्रियता प्रभावित हुई। इसके बाद बच्चों में मांसपेशियों और रीढ़ से जुड़ी परेशानियों को लेकर चिंता बढ़ी है।

कम उम्र में डिस्क की समस्या क्यों बढ़ रही?

बच्चों में पीठ दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना, गलत पोश्चर, भारी स्कूल बैग उठाना और नियमित व्यायाम नहीं करना भी परेशानी बढ़ा सकता है। इसके अलावा खेलते समय चोट लगना या मांसपेशियों में खिंचाव भी पीठ दर्द का कारण बन सकता है।

हालांकि, हर पीठ दर्द को डिस्क की बीमारी नहीं माना जा सकता। बच्चों में लगातार दर्द रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। खासकर यदि दर्द रात में बढ़ता है, चलने-फिरने में परेशानी होती है या पैरों में कमजोरी और सुन्नपन महसूस होता है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बार-बार CT स्कैन से रेडिएशन का खतरा

बच्चों की जांच में CT स्कैन का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार किया जाता है, लेकिन इसमें एक्स-रे आधारित रेडिएशन होता है। बच्चों का शरीर रेडिएशन के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। इसलिए बिना स्पष्ट चिकित्सकीय जरूरत के बार-बार CT स्कैन कराने से बचना चाहिए।

डॉक्टरों की सलाह है कि जांच का तरीका बच्चे की समस्या और चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर तय किया जाए। कई स्थितियों में MRI या अन्य जांच विकल्प उपयोगी हो सकते हैं, जिनमें आयनीकरण रेडिएशन नहीं होता। हालांकि, कौन-सी जांच जरूरी है, इसका फैसला विशेषज्ञ डॉक्टर ही करते हैं।

बच्चों की दिनचर्या में बदलाव जरूरी

बच्चों को लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलने और खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। पढ़ाई के दौरान बैठने का तरीका सही होना चाहिए। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर के इस्तेमाल के बीच ब्रेक देना भी जरूरी है।

माता-पिता को बच्चों की पीठ दर्द की शिकायत को सामान्य थकान समझकर लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि दर्द बार-बार हो रहा है या कई दिनों तक बना रहता है तो बाल रोग विशेषज्ञ या हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

कम उम्र में रीढ़ से जुड़ी समस्याओं की पहचान और सही उपचार से बच्चों को आगे होने वाली परेशानियों से बचाने में मदद मिल सकती है।