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फर्जी डेपुटेशन आदेश से स्कूल में जॉइनिंग का मामला, शिक्षक के खिलाफ FIR दर्ज; जांच में खुली पोल

 
फर्जी डेपुटेशन आदेश से स्कूल में जॉइनिंग का मामला, शिक्षक के खिलाफ FIR दर्ज; जांच में खुली पोल

राजस्थान के शिक्षा विभाग से जुड़ा एक फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जहां एक शिक्षक पर कथित रूप से फर्जी डेपुटेशन आदेश तैयार कर स्कूल में रिलीव होने का आरोप लगा है। मामले की जांच के बाद विभाग ने शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। आरोप है कि शिक्षक ने खुद को अजमेर से हनुमानगढ़ के एक स्कूल में स्थानांतरित दिखाने के लिए फर्जी आदेश का इस्तेमाल किया।

जानकारी के अनुसार, संबंधित शिक्षक ने डेपुटेशन आदेश के आधार पर खुद को अजमेर जिले से हनुमानगढ़ स्थित स्कूल में रिलीव करवाया था। शुरुआत में दस्तावेजों के आधार पर प्रक्रिया पूरी कर दी गई, लेकिन बाद में आदेश की सत्यता को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान सामने आया कि शिक्षक की ओर से प्रस्तुत किया गया डेपुटेशन आदेश संदिग्ध था। संबंधित विभागीय रिकॉर्ड में इस तरह के किसी आदेश की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की।

शिक्षा विभाग की जांच में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद आरोपी शिक्षक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी आदेश किस तरह तैयार किया गया और इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं।

बताया जा रहा है कि शिक्षक ने नौकरी से जुड़ा लाभ लेने और मनचाही जगह पर पदस्थापन के उद्देश्य से यह कदम उठाया। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी सेवा में लाभ लेने के मामले को विभाग गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

पुलिस अब मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही डेपुटेशन आदेश तैयार करने वाले व्यक्ति या माध्यम की भी जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

शिक्षा विभाग में फर्जी आदेश और दस्तावेजों के जरिए स्थानांतरण या पदस्थापन कराने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए विभाग अब आदेशों के सत्यापन और रिकॉर्ड जांच की प्रक्रिया को और मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

फिलहाल इस मामले में शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है और आगे की कार्रवाई पुलिस जांच के आधार पर की जाएगी।