अजमेर की पैरा निशानेबाज सृष्टि अरोड़ा ने नौकरी छोड़ थामी पिस्टल, एशियाई पैरा खेलों में जीता कांस्य पदक
हौसले बुलंद हों तो चुनौतियां भी कामयाबी का रास्ता बन जाती हैं। राजस्थान के अजमेर की पैरा निशानेबाज सृष्टि अरोड़ा ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से इसे साबित कर दिखाया है। जन्म से दाएं हाथ की हथेली नहीं होने के बावजूद सृष्टि ने निशानेबाजी में करियर बनाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने अच्छी नौकरी तक छोड़ दी। अब उनकी मेहनत रंग ला रही है और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में सृष्टि ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया।
नौकरी छोड़कर निशानेबाजी को बनाया लक्ष्य
सृष्टि अरोड़ा ने वर्ष 2023 तक कभी पिस्टल नहीं पकड़ी थी। इससे पहले वह मुंबई में नौकरी कर रही थीं। इसी दौरान उनकी निशानेबाजी में रुचि बढ़ी और उन्होंने इस खेल में करियर बनाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा ध्यान अभ्यास पर लगा दिया।
सृष्टि के लिए यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने आगे बढ़ने का रास्ता चुना। निशानेबाजी की शुरुआत करने के बाद उन्होंने पहली बार जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें बड़े मुकाबलों के लिए प्रेरित किया।
एशियाई पैरा खेलों में कांस्य पदक
सृष्टि ने एशियाई पैरा खेलों में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच-1 स्पर्धा के फाइनल में 214.7 अंक हासिल किए। आठ निशानेबाजों के बीच हुए मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहीं। ईरान की फैजेह अहमदी ने 237.3 अंक के साथ स्वर्ण और उनकी हमवतन सारेह जवानमर्दी ने 237 अंक के साथ रजत पदक जीता।
सृष्टि ने क्वालिफिकेशन राउंड में पांचवां स्थान हासिल कर फाइनल में जगह बनाई थी। फाइनल की शुरुआत उनके लिए चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन उन्होंने दबाव के बीच खुद को संभाला और शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। यह एशियाई पैरा खेलों में उनका पहला पदक था।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां
सृष्टि ने कम समय में निशानेबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, वह राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 28 पदक जीत चुकी हैं। वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व कप में उन्होंने दो स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल किया था। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित विश्व कप में भी उन्होंने टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते।
सितंबर 2026 में दक्षिण कोरिया में हुई विश्व पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में भी सृष्टि ने दो पदक अपने नाम किए थे। उन्होंने मनीष नरवाल के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड स्पर्धा में कांस्य और एक टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता।
अब लक्ष्य पैरालंपिक 2028
सृष्टि फिलहाल दिल्ली में भारतीय खेल प्राधिकरण की व्यवस्था के तहत आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य वर्ष 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करना और पदक जीतना है।
सृष्टि की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो शारीरिक चुनौतियों या कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने के बारे में सोचते हैं। उन्होंने दिखाया है कि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। नौकरी छोड़कर खेल को चुनने का उनका फैसला अब अंतरराष्ट्रीय पदक में बदल चुका है।
