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अजमेर- पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष की बहू बनी नई मेयर:पुष्कर के गायत्री महायज्ञ में संभाली थी फाइनेंस मैनेजमेंट की जिम्मेदारी, पहली बार लड़ा चुनाव

 
अजमेर में पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष की बहू बनीं नई मेयर: पहली बार चुनाव लड़ा, पुष्कर के गायत्री महायज्ञ में संभाली थी फाइनेंस मैनेजमेंट की जिम्मेदारी

अजमेर नगर निगम को नई मेयर मिल गई हैं। पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष की बहू ने मेयर पद पर जीत दर्ज कर स्थानीय राजनीति में अपनी नई पहचान बनाई है। खास बात यह है कि उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और पहली ही कोशिश में मेयर पद तक पहुंचने में सफलता हासिल की।

नई मेयर का सामाजिक और धार्मिक आयोजनों से भी जुड़ाव रहा है। इससे पहले पुष्कर में आयोजित गायत्री महायज्ञ के दौरान उन्होंने फाइनेंस मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभाली थी। आयोजन से जुड़े वित्तीय प्रबंधन का काम संभालने के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

मेयर बनने से पहले उनका राजनीतिक सफर सीधे चुनावी राजनीति से शुरू हुआ। पहली बार चुनाव मैदान में उतरने के बाद उन्होंने जीत हासिल की और इसके बाद मेयर पद के लिए हुए चुनाव में भी सफलता प्राप्त की। उनके मेयर बनने के साथ ही अजमेर नगर निगम की राजनीति में एक नया चेहरा सामने आया है।

उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही है। उनके ससुर पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में परिवार के राजनीतिक अनुभव का भी उन्हें लाभ मिला। हालांकि उन्होंने खुद पहली बार चुनाव लड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा और अब नगर निगम की जिम्मेदारी संभालेंगी।

मेयर पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सामने अजमेर शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। शहर में सफाई व्यवस्था, सड़कें, यातायात, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर करना नगर निगम की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।

नई मेयर के सामने नगर निगम के कामकाज में पारदर्शिता और पार्षदों के साथ समन्वय बनाए रखने की भी चुनौती होगी। पहली बार चुनाव लड़कर मेयर बनने के कारण उनके राजनीतिक सफर पर अब शहर की नजर रहेगी।

अजमेर नगर निगम के नए नेतृत्व से शहर के विकास कार्यों को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। वहीं राजनीतिक तौर पर भी उनका मेयर बनना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ते हुए सीधे नगर निगम के शीर्ष पद तक का सफर तय किया है।