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Sikar 1.88 लाख लोगों से लेना था फीडबैक, 68 हजार से लिया, जिला 38वें नंबर पर

 
Sikar 1.88 लाख लोगों से लेना था फीडबैक, 68 हजार से लिया, जिला 38वें नंबर पर

सीकर न्यूज़ डेस्क, सीकर  पड़ताल में सामने आया है कि यह कामआशा सहयोगनी के जिम्मे है। इनको टारगेट तो दिए,लेकिन जिला और ब्लॉक स्तर पर मॉनिटरिंग नहीं हुई।इससे सर्वे में आैपचारिकता रह गई। सर्वे शुरू करनेसे पहले प्रशिक्षण दिया गया था। इसमें बताया गया थाकि लोगों से ज्यादा से ज्यादा फीडबैक लें ताकि यहपता चल सके कि जिले के लोग स्वास्थ्य सेवा मेंकिस तरह की सुविधाएं चाहते हैं। लोगों की यह रूचिजानने के लिए टीमें घरों तक नहीं पहुंची। इसकामतलब साफ है कि प्रशिक्षण के बिंदुओं को गंभीरतासे नहीं लिया। राज्य सरकार ने फीडबैक दर्ज करवानेके लिए एप डवलप कराया है, जिसमें रोज यह बतानाहै कि कितने लोगों से फीडबैक लिया। फीडबैक कीरिपोर्ट भी इस एप पर दर्ज करनी थी। लेकिन स्वास्थ्यटीमों से अफसरों ने यह जानने का प्रयास ही नहींकिया सर्वे हो रहा है या नहीं।

राजस्थान विजन डॉक्यूमेंट-2030 तैयार करने केलिए सुझाव लिए जा रहे हैं। लोगों से मिलेसुझावों के आधार भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओंका रोडमैप तैयार होगा। स्वास्थ्य विभाग इसकेलिए फेस टू फेस सर्वे करवा रहा है। इस सर्वे मेंसीकर पिछड़ रहा है। प्रदेश में 37वें नंबर है।सीकर से कम संसाधन वाला प्रतापगढ़ नंबर-1बना हुआ है। प्रतापगढ़ में टारगेट के मुकाबलेआमजन का 105% फीडबैक मिला। जबकिसीकर की प्रगति सिर्फ 37% है। मुख्यालय नेस्वास्थ्य विभाग को एक लाख 88 हजार सेज्यादा लोगों के सुझाव लेने की जिम्मेदारी दी थी।13 सितंबर तक 68,697 लोगों का फीडबैक हीलिया गया है।

सुझाव लेने में जोधपुर सबसेपिछड़ा जिला है। सर्वे में यहां 13% लोगों केसुझाव लिए हैं।स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे का जिम्मा आशासहयोगिनियों का सौंपा है। इन्हें घर-घर पहुंचकरसुझाव लेने हैं। पूछना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में10 गुना प्रगति के लिए क्या प्रयास होने चाहिए।प्राथमिक स्तर पर कम समय में इलाज उपलब्धकराने के लिए क्या तरीका अपनाना चाहिए।ताकि बीमारियों से मौत रोकी जा सके। ग्राम स्तरपर रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता, स्वास्थ्य क्षेत्र मेंमैनेजमेंट, स्वास्थ्य जानकारी को पाठ्यक्रम मेंशामिल करने जैसे सवाल हैं।