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Pratapgarh छोटीसादड़ी में आयुर्वेद अस्पताल को अभी तक नहीं मिली जगह

 
Pratapgarh छोटीसादड़ी में आयुर्वेद अस्पताल को अभी तक नहीं मिली जगह
प्रतापगढ़ न्यूज़ डेस्क, प्रतापगढ़  छोटीसादड़ी में आयुर्वेद विभाग का खुद का भवन नहीं है। ऐसे में यहां चिकित्साकर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सालय अभी भी अपने भवन के लिए तरस रहा है। अलग-अलग भवनों में संचालित होने वाला यह चिकित्सालय रोगियों के लिए किसी परेशानी से कम नहीं है।ं छोटीसादड़ी उपखंड मुख्यालय पर स्थित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय एक और जहां लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं के लिए खुद चिकित्सालय भी मोहताज है। अलग-अलग स्थान पर आयुर्वेदिक औषधालय का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में भवन के अभाव में एक गोदाम में इस चिकित्सालय का संचालन किया जा रहा है। जो नगर के गांधी चौराहे पर स्थित है। इससे पहले मुक्ति धाम के पास स्थित राजकीय विद्यालय भवन में संचालन हो रहा था। कोरोना संक्रमण काल के दौरान आयुर्वेद में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका साबित की है। लेकिन बार-बार विभाग से भूमि की मांग होने के बावजूद अब तक सरकार से चिकित्सालय के लिए कोई भवन नहीं मिला है।

नहीं है कोई साइड इफेक्ट, फायदेमंद है उपचार

आयुर्वेदिक औषधालय के प्रभारी डॉ. राहुलचंद्र रेगर बताते हैं कि आयुर्वेद पद्धति के माध्यम से बड़ी संख्या में रोगियों का उपचार किया जा रहा है। यह भारत की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति है और इस चिकित्सा पद्धति का फायदा यह है कि इसमें कोई साइड इफेक्ट नहीं है। ऐसे में दवाइयां से शरीर को होने वाले नुकसान का कोई खतरा इस चिकित्सा पद्धति में नहीं है। आयुर्वेद में उपचार कराने के बाद कई रोगियों को रोग से छुटकारा मिल गया है। भगवानपुरा के उदयलाल धाकड़ ने बताया कि उसके दोनों गुर्दे सिर्फ 10 फीसद तक काम कर रहे थे। वह लगभग किडनी फेल्योर की स्थिति में पहुंचने वाले थे।

चित्तौड़गढ़ और उदयपुर अस्पताल में तीन बार डायलिसिस भी करा चुके थे। मगर उसे राहत नहीं मिल पा रही थी। आयुर्वेदिक उपचार से तीन माह दवा चलने के बाद वह ठीक हो गया। अब वह सामान्य जीवन जी रहे हैं। छोटीसादड़ी के बाबूलाल साहू ने बताया कि उसे कई सालों से शुगर थी। और इंसुलिन लेने पड़ते थे। आयुर्वेद दवाओं से दो महीनों में इंसुलिन से छुटकारा मिल गया। अब वह मीठा भी खा रहे है। रमेश राव मराठा ने बताया कि उसे सांस की बीमारी थी। उसके बाद किसी ने आयुर्वेद उपचार करने की सलाह दी। चार माह से आयुर्वेद उपचार करवाने के बाद आज में पूरी तरह से स्वस्थ है। अनिता सेन ने बताया कि उसे करीब पांच सालों से छींक आने की एलर्जी से परेशानी थी। बार-बार एलोपैथी गोलियां लेनी पड़ती थी। फिर आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करने के बाद में ठीक हो गई। इसी प्रकार कई रोगियों ने आवुर्येद के सहारे अपना उपचार लिया। इसके बाद वे स्वस्थ्य हो गए। ऐसे में आयुर्वेदिक उपचार में लोगों का रुझान बढ़ रहा है।