राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ, जल्द हो सकती है बड़ी टूट: सीपी जोशी
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा कांग्रेस के मौजूदा माहौल पर चिंता जताए जाने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा है कि आने वाले समय में कांग्रेस में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है।
चित्तौड़गढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीपी जोशी ने कहा, "कांग्रेस अब एकजुट पार्टी नहीं रह गई है और विभिन्न गुटों में बंट चुकी है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष और खींचतान जारी है, जिसका असर अब खुलकर दिखाई देने लगा है।"
उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर बड़े स्तर पर राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
सांसद जोशी ने कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी अब यह महसूस होने लगा है कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति और नेतृत्व को लेकर जारी संघर्ष इसके प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान को भी इसी संदर्भ में देखा। जोशी ने कहा कि गहलोत की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर भी अंदरूनी स्तर पर हलचल है और यह सब पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का हिस्सा है।
भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी के पास न स्पष्ट नीति है, न मजबूत नेतृत्व और न ही भविष्य की कोई ठोस दिशा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर जनता की भावनाओं के विपरीत रुख अपनाया, जिसके कारण लोगों का भरोसा उससे लगातार कम होता गया।
जोशी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 हटाने, तीन तलाक कानून, महिला आरक्षण और अन्य कई मुद्दों पर कांग्रेस का विरोध जनता ने देखा है। उनके अनुसार, यही वजह है कि देशभर में कांग्रेस का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है।
गहलोत और सचिन पायलट के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक मतभेदों का उल्लेख करते हुए जोशी ने कहा कि यह विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। राजस्थान में कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर संघर्ष आगे भी जारी रहेगा और इसका असर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर पड़ सकता है।
--आईएएनएस
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