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प्रकाश पादुकोण: कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन में देश को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। भारत में बैडमिंटन को लोकप्रिय बनाने और इस खेल में देश की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने में जिन खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही है, उनमें प्रकाश पादुकोण का नाम प्रमुख है। प्रकाश की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1980 में वह दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी थे।
 
प्रकाश पादुकोण: कॉमनवेल्थ गेम्स में बैडमिंटन में देश को दिलाया पहला स्वर्ण पदक

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। भारत में बैडमिंटन को लोकप्रिय बनाने और इस खेल में देश की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने में जिन खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही है, उनमें प्रकाश पादुकोण का नाम प्रमुख है। प्रकाश की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1980 में वह दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी थे।

प्रकाश पादुकोण का जन्म बेंगलुरु में 10 जून 1955 को हुआ था। प्रकाश को बैडमिंटन के क्षेत्र में लाने में उनके पिता रमेश पादुकोण का अहम रोल रहा था। रमेश पादुकोण लंबे समय तक मैसूर बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रहे थे और उन्हीं की प्रेरणा से प्रकाश इस खेल में आए।

1962 में पादुकोण अपना पहला आधिकारिक टूर्नामेंट कर्नाटक स्टेट जूनियर चैंपियनशिप खेले थे। अपने पहले टूर्नामेंट में उन्हें निराशा हाथ लगी थी, लेकिन इसके बाद वे स्टेट जूनियर टाइटल जीतने में कामयाब रहे। 1972 में उन्होंने इंडियन नेशनल जूनियर खिताब जीता और उसी साल सीनियर खिताब भी जीता। प्रकाश ने अगले सात सालों तक लगातार नेशनल टाइटल जीता।

प्रकाश पादुकोण को पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में मिली। एडमोंटन, कनाडा में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रकाश ने पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता था। वह भारत की तरफ से कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे। 1979 में, उन्होंने लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में 'इवनिंग ऑफ चैंपियंस' जीता। 1980 में डेनिश ओपन, स्वीडिश ओपन और इंडोनेशिया के लिएम स्वी किंग पर जीत के साथ ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप में पुरुष एकल खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने।

उनकी अन्य उपलब्धियों पर गौर करें तो 1983 में कोपेनहेगन में हुए विश्व चैंपियनशिप में एकल में कांस्य पदक, विश्व कप 1980 में पुरुष एकल में कांस्य पदक, 1981 विश्व कप पुरुष एकल में स्वर्ण पदक, वर्ल्ड गेम्स 1981 में पुरुष एकल में कांस्य पदक, एशियन गेम्स तेहरान (1974) में कांस्य, और एशियन गेम्स सियोल (1986) में उन्होंने कांस्य पदक, एशियन चैंपियनशिप 1976 में कांस्य, और 1983 में रजत पदक शामिल है।

1991 में खेल से संन्यास के बाद पादुकोण कुछ समय के लिए बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे। उन्होंने 1993 से 1996 तक इंडियन नेशनल बैडमिंटन टीम के कोच के तौर पर भी काम किया। पादुकोण ने गीत सेठी के साथ मिलकर ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट शुरू किया, जो इंडिया में ओलंपिक स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए एक फाउंडेशन है।

बैडमिंटन के क्षेत्र में प्रकाश पादुकोण के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1972 में अर्जुन पुरस्कार और 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।

प्रकाश पादुकोण अपनी बैडमिंटन अकेडमी के माध्यम से युवा खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में सक्रिय हैं।

बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, प्रकाश पादुकोण की बेटी हैं।

--आईएएनएस

पीएके